विस्तृत उत्तर
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग गुजरात में द्वारका के निकट दारुकावन (वर्तमान द्वारका क्षेत्र) में स्थित है। यह 12 ज्योतिर्लिंगों में दसवाँ है। 'नागेश' का अर्थ है नागों के स्वामी शिव।
शिव पुराण में इसकी कथा इस प्रकार है — दारुक नाम का एक अत्याचारी राक्षस और उसकी पत्नी दारुका थी। दारुका को माता पार्वती का वरदान प्राप्त था इसलिए वह अजेय थी। दारुक ने अपने वन (दारुकावन) सहित समुद्र में निवास करते हुए समुद्री यात्रियों को पकड़कर कैद करना शुरू किया। एक बार सुप्रिय नाम का परम शिवभक्त वैश्य समुद्र मार्ग से कहीं जा रहा था। दारुक ने उसे और अन्य यात्रियों को पकड़कर कारागार में बंद कर दिया।
सुप्रिय कारागार में भी भगवान शिव की नित्य पूजा करता रहा और अन्य कैदियों को भी शिव-भक्ति की प्रेरणा देता रहा। जब दारुक को यह पता चला, वह सुप्रिय को मारने के आदेश देने आया। उसी क्षण सुप्रिय ने शिव से पुकारी। भगवान शिव भूमि से एक विवर (छिद्र) से ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए — साथ ही एक चार द्वारों का सुंदर मंदिर भी प्रकट हुआ। शिव ने सुप्रिय को पाशुपतास्त्र दिया। उससे दारुक का वध हुआ और सुप्रिय मुक्त हुआ। शिव जी के आदेश से वह ज्योतिर्लिंग 'नागेश्वर' नाम से प्रसिद्ध हुआ।





