विस्तृत उत्तर
मेघनाद (इंद्रजीत) के पास त्रिदेवों के तीनों सर्वोच्च महास्त्र थे — जो उसे ब्रह्माण्ड का सबसे शक्तिशाली योद्धा बनाते थे।
त्रिदेव के महास्त्र — मेघनाद ने शुक्राचार्य की सहायता से सात यज्ञ करके और शिव की घोर तपस्या करके तीनों त्रिदेवों से अस्त्र प्राप्त किए। ब्रह्मास्त्र (ब्रह्मा से), नारायणास्त्र (विष्णु से) और पाशुपतास्त्र (शिव से) — ये तीनों ब्रह्माण्ड की सर्वशक्तिशाली अस्त्र-त्रयी थी।
नागपाश — शिव की कृपा से प्राप्त यह अस्त्र विषैले नागों का जाल था जिससे उसने राम-लक्ष्मण सहित पूरी वानर-सेना को जकड़ा था।
नागास्त्र — इस अस्त्र का प्रयोग भी मेघनाद ने किया था।
वासवी शक्ति (इंद्रास्त्र) — कुछ परंपराओं में मेघनाद के पास यह भी था जिसका प्रयोग उसने लक्ष्मण पर किया था।
दिव्य रथ — निकुंभला यज्ञ के फलस्वरूप उसे एक ऐसा दिव्य रथ प्राप्त था जो मन की गति से चलता था और जिस पर बैठकर वह अदृश्य रहता था।
अक्षय तरकश और दिव्य धनुष — कभी न खत्म होने वाले बाण।





