विस्तृत उत्तर
गरुड़ द्वारा नागपाश तोड़ने की विधि अत्यंत सरल थी क्योंकि गरुड़ स्वभावतः नागों के परम शत्रु हैं।
गरुड़ का नाग-शत्रुत्व — भगवान गरुड़ विष्णु के वाहन हैं और सनातन परंपरा में नागों के जन्मजात शत्रु माने जाते हैं। जहाँ गरुड़ होते हैं वहाँ नाग नहीं टिक सकते।
नागपाश तोड़ने की विधि — हनुमान जी के साथ लंका पहुँचकर गरुड़देव ने राम-लक्ष्मण के ऊपर लिपटे हुए सभी विषैले नागों को अपनी चोंच से एक-एक करके काट डाला। नागों के कट जाने के साथ ही नागपाश का बंधन शिथिल पड़ गया और दोनों भाई मुक्त हो गए।
गरुड़ का प्रभाव — वाल्मीकि रामायण में वर्णन है कि गरुड़देव को आते देखकर ही नाग भयभीत हो गए। गरुड़ की उपस्थिति मात्र से नागों की शक्ति क्षीण होने लगती है। इसीलिए वरदान के बावजूद नागपाश, गरुड़ के सामने टिक नहीं सका।





