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विस्तृत उत्तर
जब गरुड़ देव आकाश से उतरकर राम और लक्ष्मण को नागपाश से मुक्त करने के बाद उन्होंने इस अस्त्र की प्रकृति के बारे में बताया। गरुड़ ने कहा कि यह अस्त्र कद्रू के विषैले पुत्रों अर्थात् नागों की राक्षसी माया थी, जिसे इंद्रजीत ने अपनी तपस्या के बल पर साधा था। इस प्रकार गरुड़ ने स्पष्ट किया कि नागपाश की शक्ति का मूल स्रोत कद्रू के नाग पुत्रों की राक्षसी शक्ति और मेघनाद की तपस्या का संयोग था।
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