विस्तृत उत्तर
नारायणास्त्र को प्राप्त करने के मुख्यतः दो मार्ग वर्णित हैं। पहला मार्ग था भगवान नारायण की कठोर तपस्या द्वारा — इस अस्त्र को सीधे भगवान नारायण की अत्यंत कठिन और असाधारण निष्ठापूर्ण तपस्या करके उनसे वरदान स्वरूप प्राप्त किया जा सकता था। यह तपस्या इतनी गहन होती थी कि केवल वही आत्माएं इसे सिद्ध कर पाती थीं जो आध्यात्मिक रूप से अत्यंत उन्नत हों। दूसरा मार्ग था गुरु-शिष्य परंपरा द्वारा हस्तांतरण — दिव्यास्त्रों का ज्ञान प्राचीन भारत में गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से भी योग्य शिष्यों को हस्तांतरित किया जाता था।
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