विस्तृत उत्तर
इंद्रजीत का निकुंभला यज्ञ और उसके भंग होने की कथा रामायण के निर्णायक प्रसंगों में से एक है।
यज्ञ क्यों था — ब्रह्माजी ने मेघनाद को वरदान दिया था कि यदि वह युद्ध में जाने से पहले अपनी कुलदेवी निकुंभला (प्रत्यंगिरा देवी) का यज्ञ पूर्ण कर ले, तो उसे एक ऐसा दिव्य रथ प्राप्त होगा जिस पर बैठकर वह किसी भी युद्ध में अपराजेय रहेगा। इस रथ के साथ कोई भी देवता या मानव उसे पराजित नहीं कर सकता था। यज्ञ मांस और रक्त की आहुतियों से संपन्न होता था।
यज्ञ पर शर्त — परंतु ब्रह्मा ने यह भी कहा था — यदि कोई शत्रु यज्ञ को बीच में विफल कर दे तो यज्ञकर्ता उसी के हाथों मारा जाएगा।
यज्ञ क्यों तोड़ा — विभीषण जानते थे कि यदि यज्ञ पूर्ण हो गया तो मेघनाद को कोई नहीं हरा सकता। उन्होंने लक्ष्मण को मार्गदर्शन दिया। हनुमान वानर-सेना लेकर यज्ञ-स्थल पर पहुँचे और यज्ञ भंग कर दिया। यज्ञ भंग होते ही मेघनाद की अजेयता समाप्त हुई और लक्ष्मण के हाथों उसका वध संभव हुआ।





