विस्तृत उत्तर
जब मेघनाद ने ब्रह्मशिरा अस्त्र से वानर सेना का भीषण संहार आरंभ किया तब हनुमान जी वानरों की रक्षा के लिए आगे आए। उस समय मेघनाद ने हनुमान जी पर वैष्णवास्त्र का प्रयोग किया। परंतु ब्रह्मा जी के वरदान के कारण हनुमान जी पर इस अस्त्र का कोई प्रभाव नहीं हुआ। यह घटना यह दर्शाती है कि वैष्णवास्त्र की असीम शक्ति के बावजूद दिव्य विधान और पात्र की दिव्यता के अधीन था। यह अंधाधुंध विनाश का हथियार नहीं था बल्कि धर्म और न्याय के सिद्धांतों से संचालित होता था।
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