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आनंद रामायण का गुप्त हनुमत् कवच: 72 घंटे में शत्रु और प्रेत बाधा का नाश!
हनुमत्

आनंद रामायण का गुप्त हनुमत् कवच: 72 घंटे में शत्रु और प्रेत बाधा का नाश!

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हनुमत् कवचम् - आनन्द रामायण

आनन्द रामायण (मनोहर काण्ड) से हनुमत् कवचम्

मंत्र पाठ

"ॐ नमो हनुमते सर्वग्रहा भूत भविष्यत्वर्तमान समीपस्थान् सर्वकालदुष्टबुद्धीन् उच्चाटन उच्चाटय परबलान् क्षोभय क्षोभय मम सर्वकार्याणि साधय साधय ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं फट् घे घे घे ॐ शिवसिद्धं ॐ ह्रीं ॐ हूं ॐ ह्रौं ॐ ह्रः स्वाहा।"

यह मंत्र विभिन्न बीजाक्षरों और आक्रामक क्रियाओं (उच्चाटन, क्षोभय, साधय) से युक्त है, जो इसकी तांत्रिक प्रकृति को स्पष्ट करता है।

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विनियोग, न्यास, फलश्रुति एवं पाठ विधि

इस कवच के पाठ से पूर्व इसका विनियोग, करन्यास, अंगन्यास और दिगबंधन करने का विधान है। उदाहरणार्थ, विनियोग में ऋषि, छंद , देवता आदि का स्मरण किया जाता है। न्यास द्वारा मंत्र की शक्ति को शरीर के विभिन्न अंगों में स्थापित किया जाता है। इस कवच की फलश्रुति में सर्व शत्रु नाश, सर्व ज्वर नाश, ब्रह्मराक्षस-पिशाच बाधा निवारण और सर्व कार्य सिद्धि का उल्लेख मिलता है।

एक महत्वपूर्ण निर्देश यह भी है कि इस हनुमत् कवच का पाठ श्रीराम कवच के बिना नहीं करना चाहिए, अन्यथा पाठ निष्फल हो सकता है।

अध्याय/कांड संदर्भ

यह कवच आनंद रामायण के मनोहर काण्ड में वर्णित है।

विश्लेषण

आनंद रामायण का यह हनुमत् कवच अपनी संरचना, बीजाक्षरों के प्रयोग और विशिष्ट फलश्रुति के कारण अत्यंत गोपनीय और शक्तिशाली माना जाता है। इसका विधान जटिल है, जो इसे सामान्य साधकों की पहुँच से कुछ दूर रखता है, और यही इसकी अल्पज्ञातता का एक कारण हो सकता है।