विस्तृत उत्तर
मेघनाद द्वारा इंद्र को पराजित करने की कथा वाल्मीकि रामायण और मेघनाद विकिपीडिया दोनों में विस्तार से मिलती है।
पृष्ठभूमि — रावण और इंद्र के बीच युद्ध में एक बार इंद्र ने रावण को हरा दिया और उसे बंदी बना लिया। जब मेघनाद को यह पता चला तो वह क्रोधित हो गया।
मेघनाद का युद्ध — मेघनाद अपने दिव्य रथ पर अदृश्य होकर इंद्र के पास पहुँचा। इंद्र और देवताओं की सेना उसका मुकाबला नहीं कर पाई क्योंकि वह अदृश्य रहकर युद्ध करता था। स्वयं देव-सेनापति कार्तिकेय भी उसे नहीं रोक पाए।
इंद्र बंदी — मेघनाद ने न केवल देवताओं को पराजित किया बल्कि इंद्र को बंदी बनाकर लंका ले आया।
ब्रह्मा का हस्तक्षेप — स्वर्गलोक का संतुलन बनाए रखने के लिए भगवान ब्रह्मा स्वयं मेघनाद के पास आए और इंद्र को मुक्त करने का आग्रह किया। बदले में ब्रह्मा ने उसे 'इंद्रजीत' की उपाधि और निकुंभला यज्ञ का वरदान दिया।





