विस्तृत उत्तर
इंद्रजीत नाम मेघनाद को ब्रह्मदेव ने दिया था — देवराज इंद्र को युद्ध में पराजित और बंदी बनाने के उपलक्ष्य में।
नाम का अर्थ — 'इंद्रजीत' = इंद्र + जित = जिसने इंद्र को जीता। 'इंद्रजित' भी लिखा जाता है। इस नाम के साथ उसे 'वासवजीत' (वासव = इंद्र) और 'शक्रजीत' भी कहा गया।
उपाधि प्राप्ति का प्रसंग — जब मेघनाद ने इंद्र को बंदी बनाकर लंका लाया और रावण इंद्र का वध करने की सोचने लगा, तब भगवान ब्रह्मा स्वयं आए। उन्होंने मेघनाद से इंद्र को मुक्त करने का आग्रह किया। मेघनाद के इस महापराक्रम को सम्मानित करने के लिए ब्रह्मा ने दो उपहार दिए — 'इंद्रजीत' की उपाधि और निकुंभला यज्ञ का वरदान।
जन्म-नाम — उसका जन्म-नाम 'मेघनाद' था क्योंकि जन्म के समय वह मेघ (बादल) के समान गरजा था। ब्रह्मा ने स्वयं उसे 'मेघनाद' पुकारा था।





