विस्तृत उत्तर
लंकापति रावण के पुत्र मेघनाद (इंद्रजीत) ने विकट तपस्या करके भगवान शिव को प्रसन्न किया था और उनसे वरदान के रूप में नागपाश प्राप्त किया था। इसके अतिरिक्त मेघनाद की शक्ति का एक और बड़ा स्रोत उसका नागवंश से संबंध था। उसकी पत्नी सुलोचना नागराज वासुकि की पुत्री थी। इस विवाह संबंध ने उसे नागों के लोक तक पहुंच प्रदान की, जिससे वह दुनिया के सबसे भयानक और विषैले सर्पों की शक्ति का उपयोग कर सका। यह माना जाता है कि उसने इन्हीं विशिष्ट सर्पों के बीज से अपने नागपाश का निर्माण किया था जिससे उसकी शक्ति कई गुना बढ़ गई।
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