विस्तृत उत्तर
मेघनाद (इंद्रजीत) का वध वाल्मीकि रामायण के युद्धकाण्ड में वर्णित है।
यज्ञ-भंग की आवश्यकता — विभीषण ने बताया था कि यदि मेघनाद के निकुंभला यज्ञ को बीच में ही भंग किया जाए तो उसे हराया जा सकता है — यह ब्रह्मा के वरदान की शर्त थी। यज्ञ पूरा होने पर उसे एक अजेय दिव्य रथ मिलता और तब वह अपराजेय हो जाता।
लक्ष्मण ही क्यों — मेघनाद को केवल वही मार सकता था जो 12 वर्षों से ब्रह्मचर्य और कठोर तपश्चर्या का पालन कर रहा हो। लक्ष्मण ने वनवास में ऐसा किया था। साथ ही मेघनाद को मारने वाला 'जितेंद्रिय' होना चाहिए था।
यज्ञ-भंग — विभीषण के मार्गदर्शन में लक्ष्मण मेघनाद के यज्ञ-स्थल पर पहुँचे और यज्ञ भंग कर दिया।
अंजलिकास्त्र से वध — यज्ञ भंग होते ही मेघनाद युद्ध के लिए आया। लक्ष्मण और मेघनाद में भीषण युद्ध हुआ। अंत में लक्ष्मण ने अंजलिकास्त्र (इंद्र का दिव्य अस्त्र) से मेघनाद का सिर धड़ से अलग कर दिया।





