विस्तृत उत्तर
जब सतीजी सीताजी का रूप धारण करके श्रीरामजी के सामने आयीं, तब लक्ष्मणजी ने उनका बनावटी वेष देखकर बड़ा आश्चर्य किया। उनके हृदय में भ्रम उत्पन्न हुआ पर वे बहुत गम्भीर हो गये और कुछ कह नहीं सके।
चौपाई — 'लछिमन दीख उमाकृत बेषा। चकित भए भ्रम हृदयँ बिसेषा। कहि न सकत कछु अति गंभीरा। प्रभु प्रभाउ जानत मतिधीरा॥'
इसका अर्थ — सतीजीके बनावटी वेषको देखकर लक्ष्मणजी चकित हो गये और उनके हृदयमें बड़ा भ्रम हो गया। वे बहुत गम्भीर हो गये, कुछ कह नहीं सके। धीरबुद्धि लक्ष्मण प्रभु रघुनाथजीके प्रभावको जानते थे (इसलिये चुप रहे)।
लक्ष्मणजी समझ गये कि यह कोई माया है, लेकिन प्रभु श्रीराम सब जानते हैं — इसलिये उन्होंने कुछ नहीं कहा।





