विस्तृत उत्तर
जब पूरी वानर सेना निराशा में डूब गई तब हनुमान की प्रार्थना पर स्वयं पक्षीराज गरुड़ आकाश में प्रकट हुए। उनका आगमन प्रलयंकारी था — एक प्रचंड हवा उठी और पर्वत कांपने लगे। अपने शाश्वत शत्रु को देखते ही सर्प-बंधन भय से कांप उठे और तुरंत राम और लक्ष्मण को छोड़कर भाग गए। इसके बाद गरुड़ ने धीरे से भाइयों को स्पर्श किया, उनके घावों को ठीक किया और उनकी शक्ति और तेज को पुनर्स्थापित किया। उन्होंने स्वयं को उनके शाश्वत साथी और वाहन के रूप में प्रकट किया।
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