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विस्तृत उत्तर
नागास्त्र का एकमात्र अचूक प्रतिकार था 'गरुड़ास्त्र'। इस अस्त्र के प्रयोग से असंख्य गरुड़ पक्षी प्रकट होते थे, जो नागों को अपना भोजन बना लेते थे और नागास्त्र के प्रभाव को पूरी तरह से नष्ट कर देते थे। रामायण में गरुड़ देव के स्वयं प्रकट होने से और महाभारत में सुपर्णास्त्र के प्रयोग से यह बात सिद्ध हुई। गरुड़ और नागों की पौराणिक शत्रुता ही इस प्रतिकार का आधार है।
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