विस्तृत उत्तर
भगवान विष्णु का वाहन 'गरुड़' है। गरुड़ को पक्षियों का राजा माना गया है और वे महाबली, तीव्रगामी, दिव्य गुणों से सम्पन्न पक्षी हैं। पुराणों में उन्हें विनता और कश्यप ऋषि का पुत्र बताया गया है। वेदों में भी गरुड़ का उल्लेख है जहाँ उन्हें श्येन (बाज़) के रूप में वर्णित किया गया है।
गरुड़ और भगवान विष्णु के सम्बन्ध के बारे में पुराणों में वर्णन है कि गरुड़ ने अपनी माता विनता को सर्पों की दासता से मुक्त कराने के लिए देवलोक से अमृत लाया था। उनकी शक्ति और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें अपना वाहन बनाया। गरुड़ सर्पों के शत्रु हैं और यही कारण है कि विष्णु शेषनाग पर शयन करते हुए और गरुड़ पर आरूढ़ होकर यात्रा करते हैं — यह सत्व और तमस की सहयुक्त सेवा का प्रतीक माना जाता है।
गरुड़ को धर्म, ज्ञान, वेद और शुद्धता का प्रतीक भी माना जाता है। भगवान विष्णु के एक नाम 'गरुड़ध्वज' और 'गरुड़वाहन' भी हैं। गरुड़ पुराण विष्णु जी के इसी वाहन के नाम पर है जिसमें मृत्यु के बाद की यात्रा और आत्मज्ञान का वर्णन है।





