विस्तृत उत्तर
विष्णु सहस्रनाम महाभारत के अनुशासन पर्व में वर्णित है जहाँ भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को इसका उपदेश दिया था। इसमें भगवान विष्णु के एक हजार दिव्य नामों का पाठ होता है। यह हिंदू धर्म के सर्वाधिक पवित्र और प्रचलित स्तोत्रों में से एक है।
पाठ के प्रमुख नियम और विधि इस प्रकार हैं। पाठ से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें — शरीर और मन दोनों की शुद्धि आवश्यक है। सुबह का समय, विशेषकर ब्रह्म मुहूर्त, पाठ के लिए सर्वोत्तम माना गया है। पूजा स्थान पर या भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने कुश या ऊन के आसन पर पूर्वाभिमुख बैठकर पाठ करें। आरम्भ करने से पहले भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए संकल्प लें। पाठ करते समय उच्चारण शुद्ध और स्पष्ट रखें। पाठ के बीच किसी अन्य कार्य में न उलझें — पाठ एकाग्रता के साथ पूर्ण करें। पाठ समाप्त होने के बाद पुनः भगवान को भोग अर्पित करें और आरती करें।
विशेष फल के लिए एकादशी, पूर्णिमा और गुरुवार के दिन पाठ करना अधिक शुभ माना जाता है। मूल बात यह है कि पाठ में नियमितता, श्रद्धा और भक्ति-भाव सबसे अधिक महत्वपूर्ण है — बाहरी नियमों से अधिक हृदय का समर्पण।





