विस्तृत उत्तर
भगवान विष्णु को भोग लगाने के कुछ परम्परागत विधान हैं जो उनकी प्रियता और शास्त्रीय निर्देशों पर आधारित हैं।
विष्णु जी के प्रिय भोग में सबसे पहले और सबसे अनिवार्य है — तुलसी दल। बिना तुलसी पत्ते के भगवान विष्णु का कोई भी भोग पूर्ण नहीं माना जाता। तुलसी का पत्ता भोग में अवश्य रखें। मुख्य नैवेद्य में गाय के दूध से बनी खीर उन्हें सबसे अधिक प्रिय है। इसके अतिरिक्त सूजी का हलवा, पेड़े, मखाने की खीर और पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल या चीनी का मिश्रण) भी चढ़ाया जाता है। फलों में केला विशेष रूप से प्रिय है। श्रीफल (नारियल), मौसमी फल और सूखे मेवे भी भोग में रखे जाते हैं।
तुलसी की पत्तियाँ बासी नहीं मानी जातीं, इसलिए पहले तोड़कर रखे गए तुलसी पत्ते भी अर्पित किए जा सकते हैं। भोग सदा शुद्ध, ताजा और सात्विक होना चाहिए। जूठा भोग कभी नहीं चढ़ाना चाहिए। विष्णु जी को पीला रंग अत्यंत प्रिय है, इसलिए पीली मिठाई या पीले रंग के भोग विशेष शुभ माने जाते हैं। एकादशी के दिन मखाने की खीर उन्हें विशेष प्रिय मानी जाती है।





