विस्तृत उत्तर
नैवेद्य (भोग) विधि के दौरान, जब गायत्री मंत्र और अपोज्योति मंत्र पढ़कर जल छिड़का जाता है, उसके तुरंत बाद 'अमृतमस्तु' कहा जाता है। इसका अर्थ है कि यह भोजन अमृत के समान हो जाए। यह कहकर भोग पर अंतिम बार जल छिड़का जाता है।
नैवेद्य अर्पण के समय भोग को अमृतमयी बनाने के लिए 'अमृतमस्तु' बोलकर जल छिड़का जाता है।
नैवेद्य (भोग) विधि के दौरान, जब गायत्री मंत्र और अपोज्योति मंत्र पढ़कर जल छिड़का जाता है, उसके तुरंत बाद 'अमृतमस्तु' कहा जाता है। इसका अर्थ है कि यह भोजन अमृत के समान हो जाए। यह कहकर भोग पर अंतिम बार जल छिड़का जाता है।
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