विस्तृत उत्तर
तत् त्वम् असि का अर्थ है 'वह तू ही है'। यह महावाक्य गुरु द्वारा शिष्य को दिया जाने वाला उपदेश है कि जिस परमात्मा की तुम खोज कर रहे हो, वह तुम स्वयं ही हो। यह 'मैं' और 'तू' के भेद को मिटाकर ब्रह्म के साथ एकत्व का प्रकाश साधक के भीतर भर देता है।





