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दक्षिणामूर्ति साधना⏱ 1 मिनट पठन

ज्ञान मुद्रा का मतलब क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

तर्जनी और अंगूठे का मिलन जीवात्मा और परमात्मा के एक होने का प्रतीक है जिसे ज्ञान मुद्रा कहते हैं।

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विस्तृत उत्तर

दक्षिणामूर्ति स्वरूप में शिव दाहिने हाथ की तर्जनी और अंगूठे को मिलाकर ज्ञान मुद्रा (या चिन-मुद्रा) धारण करते हैं। यह मुद्रा जीवात्मा (तर्जनी) और परमात्मा (अंगूठा) के मिलन, यानी अद्वैत तत्त्व को दर्शाती है। यह मुद्रा उनकी समस्त शिक्षाओं का सार है कि जीव और ब्रह्म एक ही हैं।

उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

ज्ञान मुद्रा का मतलब क्या है को संदर्भ सहित समझें

ज्ञान मुद्रा का मतलब क्या है का सबसे सीधा सार यह है: तर्जनी और अंगूठे का मिलन जीवात्मा और परमात्मा के एक होने का प्रतीक है जिसे ज्ञान मुद्रा कहते हैं।

दक्षिणामूर्ति साधना जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.

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उत्तर पढ़ते समय यह देखें कि उसमें नियम, अपवाद और व्यवहारिक संदर्भ साफ हैं या नहीं।

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दक्षिणामूर्ति साधना श्रेणी के दूसरे प्रश्न इस उत्तर की सीमा और उपयोग दोनों स्पष्ट करते हैं।

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यदि विस्तृत विधि या पृष्ठभूमि चाहिए, तो नीचे दिए गए लेख पहले खोलें।

दक्षिणामूर्ति साधना प्रश्नोत्तर
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