विस्तृत उत्तर
दक्षिणामूर्ति स्वरूप में शिव दाहिने हाथ की तर्जनी और अंगूठे को मिलाकर ज्ञान मुद्रा (या चिन-मुद्रा) धारण करते हैं। यह मुद्रा जीवात्मा (तर्जनी) और परमात्मा (अंगूठा) के मिलन, यानी अद्वैत तत्त्व को दर्शाती है। यह मुद्रा उनकी समस्त शिक्षाओं का सार है कि जीव और ब्रह्म एक ही हैं।





