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विस्तृत उत्तर
साधना के लिए दक्षिण दिशा (South) की ओर मुख करके बैठना चाहिए, क्योंकि दक्षिणामूर्ति स्वयं दक्षिण मुख वाले गुरु-तत्त्व हैं। साधना का सर्वश्रेष्ठ समय ब्रह्ममुहूर्त (सूर्य उदय से डेढ़ घंटे पूर्व) है, जब सात्त्विक ऊर्जा सर्वाधिक प्रबल होती है।
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