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विस्तृत उत्तर
हाँ, अद्वैत वेदांत के अनुसार यदि किसी साधक को आत्म-साक्षात्कारी मानव गुरु उपलब्ध न हों, तो वे भगवान दक्षिणामूर्ति को ही अपना गुरु मानकर उनकी उपासना कर सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि यदि साधक योग्य है, तो दक्षिणामूर्ति की कृपा से उसे अवश्य ही किसी सद्गुरु की प्राप्ति होती है।
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