शिव रूप महिमादक्षिणामूर्ति रूप में शिव किसे ज्ञान देते हैंदक्षिणामूर्ति रूप में शिव ने वट-वृक्ष के नीचे सनकादि चारों ऋषियों को मौन के माध्यम से ब्रह्म-ज्ञान का उपदेश दिया। यह रूप शिव के आदि-गुरु स्वरूप का प्रतीक है — परम ज्ञान वाणी से नहीं, मौन से मिलता है।#दक्षिणामूर्ति#सनकादि ऋषि#मौन उपदेश
शिव रूपदक्षिणामूर्ति शिव की उपासना का क्या महत्व है?दक्षिणामूर्ति = शिव का परम गुरु स्वरूप। दक्षिणामूर्ति उपनिषद् (यजुर्वेद): 24 अक्षर मंत्र। शंकराचार्य स्तोत्र: अद्वैत सार, 'मोक्ष शास्त्र'। मौन गुरु — वृद्ध शिष्यों के संशय छिन्न। गुरु न मिले तो इन्हें गुरु मानें। गुरुवार/गुरु पूर्णिमा विशेष। विद्यार्थियों के लिए बुद्धि वृद्धि।
एकादश रुद्र और अन्य स्वरूपदक्षिणामूर्ति स्वरूप क्या है?दक्षिणामूर्ति = शिव का परम शांत रूप। वे परम गुरु के रूप में मौन व्याख्यान द्वारा ऋषियों के संशयों का निवारण करते हैं।#दक्षिणामूर्ति#परम गुरु#मौन व्याख्यान
दक्षिणामूर्ति साधनाक्या शिव जी को गुरु मान सकते हैं?हाँ, मानव गुरु न मिलने पर भगवान दक्षिणामूर्ति को ही अपना गुरु मानकर साधना की जा सकती है।#गुरु#दक्षिणामूर्ति#आदि गुरु
दक्षिणामूर्ति साधनादक्षिणामूर्ति पूजा समर्पण मंत्र क्या है?समर्पण मंत्र: 'मया कृत श्री मेधो दक्षिणामूर्ति देवता नित्य पूजा फलं सर्वं... अर्पणमस्तु।'#समर्पण मंत्र#पूजा फल#दक्षिणामूर्ति
दक्षिणामूर्ति साधनाभगवान दक्षिणामूर्ति कौन हैं?भगवान दक्षिणामूर्ति शिव के आदि गुरु और परम ज्ञान के विश्व-शिक्षक स्वरूप हैं।#दक्षिणामूर्ति#शिव#आदि गुरु
शिव पूजाशिव पूजा के दौरान भगवान का ध्यान कैसे करें?शिव पूजा में ध्यान: शिव पुराण ध्यान-श्लोक — रजत-गौर, चंद्र-मस्तक, त्रिनेत्र, 4 हाथ (परशु-मृग-वर-अभय)। पंचमुख (लिंग पुराण): सद्योजात, वामदेव, अघोर, तत्पुरुष, ईशान। हृदय में ज्योतिर्लिंग ध्यान। दक्षिणामूर्ति — ज्ञान के लिए। काश्मीर शैव: 'अहं शिवः' — निर्गुण ध्यान।#शिव पूजा#शिव ध्यान#रूप-ध्यान
शिव पूजाशिव पूजा से आत्मज्ञान कैसे प्राप्त होता है?शिव पूजा से आत्मज्ञान: शिव = दक्षिणामूर्ति — ज्ञान के सर्वोच्च गुरु। शंकराचार्य: दक्षिणामूर्ति स्तोत्र — मौन से ज्ञान-दान। भस्म = अनित्य-बोध। काश्मीर शैव: 'अहं शिवः' — प्रत्यक्ष आत्मज्ञान। पंचाक्षरी: 'नमः' = अहंकार-विसर्जन → आत्मज्ञान का द्वार।#शिव पूजा#आत्मज्ञान#ब्रह्मज्ञान