विस्तृत उत्तर
शिव पूजा में भगवान के ध्यान की विधि शिव पुराण और लिंग पुराण में अत्यंत विस्तार से वर्णित है।
शिव के प्रमुख ध्यान-रूप
1सौम्य शिव (सामान्य ध्यान के लिए)
शिव पुराण का ध्यान-श्लोक:
'ध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचन्द्रावतंसं
रत्नाकल्पोज्ज्वलाङ्गं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्।'
इस श्लोक से शिव के सौम्य रूप का ध्यान करें:
- ▸रजत-पर्वत (कैलाश) जैसा श्वेत-गौर वर्ण
- ▸चंद्र-अवतंस (मस्तक पर चंद्रमा)
- ▸चार हाथों में — परशु (कुल्हाड़ी), मृग, वर-मुद्रा, अभय-मुद्रा
- ▸प्रसन्न मुखमंडल, त्रिनेत्र
2पंचमुख शिव
लिंग पुराण: शिव के पाँच मुख —
- ▸सद्योजात (पश्चिम) — श्वेत, सृजन-शक्ति
- ▸वामदेव (उत्तर) — पीत, पालन-शक्ति
- ▸अघोर (दक्षिण) — कृष्ण, संहार-शक्ति
- ▸तत्पुरुष (पूर्व) — रक्त, तिरोधान-शक्ति
- ▸ईशान (ऊर्ध्व) — धवल, अनुग्रह-शक्ति
3ज्योतिर्लिंग ध्यान
शिव पुराण: हृदय-कमल में ज्योति-स्वरूप शिवलिंग का ध्यान। 'ज्योतिर्लिंगं परमं ब्रह्म।'
4दक्षिणामूर्ति ध्यान
शिव पुराण: दक्षिण की ओर मुख, वट-वृक्ष के नीचे, ज्ञान-मुद्रा में — यह ध्यान ज्ञान-प्राप्ति के लिए।
काश्मीर शैवागम — निर्गुण ध्यान
अहं शिवः' — 'मैं शिव हूँ।' यह उन्नत साधकों के लिए — सगुण ध्यान की पराकाष्ठा।





