ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
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शिव पूजा📜 शिव पुराण, आगम शास्त्र, धर्मसिंधु2 मिनट पठन

शिव पूजा के बाद क्या करना चाहिए?

संक्षिप्त उत्तर

शिव पूजा के बाद: क्षमा-प्रार्थना ('आवाहनं न जानामि...') — अनिवार्य। अर्धपरिक्रमा (3 या 7 बार, जलधारी पार न करें)। पंचामृत प्रसाद + भस्म माथे पर। 10-20 मिनट मौन ध्यान। पुष्प/बिल्वपत्र पवित्र स्थान पर। नित्य 'ॐ नमः शिवाय' का मानसिक जप।

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विस्तृत उत्तर

शिव पूजा के बाद की जाने वाली विधियाँ शास्त्रों में विस्तार से वर्णित हैं।

शिव पूजा के बाद की विधि

1क्षमा-प्रार्थना (अनिवार्य)

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।

पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर।।'

— हे परमेश्वर! मैं आवाहन, विसर्जन और पूजा-विधि नहीं जानता — मुझे क्षमा करें।

2अर्धपरिक्रमा (3 या 7 बार)

शिव पुराण: जलधारी को पार किए बिना — दक्षिण-पश्चिम से आकर उत्तर-पूर्व तक अर्धपरिक्रमा। पूर्ण परिक्रमा निषिद्ध है।

3प्रसाद ग्रहण

पंचामृत और भोग का प्रसाद ग्रहण करें। भस्म माथे पर लगाएँ।

4मौन ध्यान (10-20 मिनट)

पूजा के तत्काल बाद कुछ देर मौन में बैठना — पूजा की ऊर्जा को आत्मसात करने के लिए।

5पूजा-सामग्री का विसर्जन

  • पुष्प, बिल्वपत्र — किसी पवित्र वृक्ष के नीचे या नदी में
  • अभिषेक का जल — पेड़ की जड़ में डालें, कूड़े में न डालें
  • कपूर की भस्म — मस्तक पर लगाएँ

6भगवान शिव का स्मरण

दिन-भर 'ॐ नमः शिवाय' का मानसिक जप — पूजा का प्रभाव दिन-भर बना रहे।

धर्मसिंधु: पूजा के बाद क्षमा-प्रार्थना करने वाले की पूजा में रही सभी त्रुटियाँ भगवान शिव स्वयं क्षमा कर देते हैं।

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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण, आगम शास्त्र, धर्मसिंधु
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