विस्तृत उत्तर
शिव पूजा के बाद की जाने वाली विधियाँ शास्त्रों में विस्तार से वर्णित हैं।
शिव पूजा के बाद की विधि
1क्षमा-प्रार्थना (अनिवार्य)
आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर।।'
— हे परमेश्वर! मैं आवाहन, विसर्जन और पूजा-विधि नहीं जानता — मुझे क्षमा करें।
2अर्धपरिक्रमा (3 या 7 बार)
शिव पुराण: जलधारी को पार किए बिना — दक्षिण-पश्चिम से आकर उत्तर-पूर्व तक अर्धपरिक्रमा। पूर्ण परिक्रमा निषिद्ध है।
3प्रसाद ग्रहण
पंचामृत और भोग का प्रसाद ग्रहण करें। भस्म माथे पर लगाएँ।
4मौन ध्यान (10-20 मिनट)
पूजा के तत्काल बाद कुछ देर मौन में बैठना — पूजा की ऊर्जा को आत्मसात करने के लिए।
5पूजा-सामग्री का विसर्जन
- ▸पुष्प, बिल्वपत्र — किसी पवित्र वृक्ष के नीचे या नदी में
- ▸अभिषेक का जल — पेड़ की जड़ में डालें, कूड़े में न डालें
- ▸कपूर की भस्म — मस्तक पर लगाएँ
6भगवान शिव का स्मरण
दिन-भर 'ॐ नमः शिवाय' का मानसिक जप — पूजा का प्रभाव दिन-भर बना रहे।
धर्मसिंधु: पूजा के बाद क्षमा-प्रार्थना करने वाले की पूजा में रही सभी त्रुटियाँ भगवान शिव स्वयं क्षमा कर देते हैं।





