विस्तृत उत्तर
पूजा और ध्यान में बैठने के आसन का विधान शिव पुराण और आगम शास्त्रों में वर्णित है।
पूजा आसन के प्रकार और विशेषताएँ
1कुशासन (कुश-घास का आसन) — सर्वश्रेष्ठ
मनुस्मृति और शिव पुराण: कुश-घास का आसन सबसे पवित्र। पृथ्वी की नकारात्मक ऊर्जा को रोकता है। ऋषि-मुनि और पूजा में अनिवार्य।
2ऊनी आसन
पतञ्जलि योगसूत्र (2.46) संदर्भ: ऊन = उष्णता और ऊर्जा-संरक्षण। शरीर से ऊर्जा का क्षय नहीं होती।
3देर-चर्म आसन (मृगचर्म — हिरण की खाल)
प्राचीन शास्त्रों में उल्लेखित, किंतु वर्तमान में पशु-संरक्षण के दृष्टिकोण से उपयोग अनुचित। इसके स्थान पर मृगचर्म-रंग का ऊनी आसन उपयोगी।
4सूती आसन
गृहस्थों के लिए स्वच्छ सूती आसन स्वीकार्य।
नियम
- ▸आसन जमीन पर बिछाएँ
- ▸शिवलिंग की ओर मुख करके बैठें — पूर्व या उत्तर दिशा
- ▸आसन का उपयोग केवल पूजा के लिए — दूसरे कार्य में उपयोग न करें
- ▸आसन को नियमित धूप दिखाएँ और शुद्ध रखें
बैठने की स्थिति
सुखासन या पद्मासन — पीठ सीधी, मेरुदंड सम। आगम शास्त्र: पूजा में पद्मासन या सुखासन में बैठना उत्तम।





