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शिव पूजा📜 शिव पुराण, पतञ्जलि योगसूत्र, मनुस्मृति, आगम शास्त्र2 मिनट पठन

शिव पूजा के दौरान कौन सा आसन उपयोग करें?

संक्षिप्त उत्तर

शिव पूजा आसन: कुशासन — सर्वश्रेष्ठ (पृथ्वी-ऊर्जा रोकता है)। ऊनी आसन — ऊर्जा-संरक्षण। सूती — गृहस्थ के लिए। पूर्व/उत्तर की ओर मुख। सुखासन/पद्मासन। केवल पूजा में उपयोग, अन्यत्र नहीं। नियमित शुद्ध रखें।

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विस्तृत उत्तर

पूजा और ध्यान में बैठने के आसन का विधान शिव पुराण और आगम शास्त्रों में वर्णित है।

पूजा आसन के प्रकार और विशेषताएँ

1कुशासन (कुश-घास का आसन) — सर्वश्रेष्ठ

मनुस्मृति और शिव पुराण: कुश-घास का आसन सबसे पवित्र। पृथ्वी की नकारात्मक ऊर्जा को रोकता है। ऋषि-मुनि और पूजा में अनिवार्य।

2ऊनी आसन

पतञ्जलि योगसूत्र (2.46) संदर्भ: ऊन = उष्णता और ऊर्जा-संरक्षण। शरीर से ऊर्जा का क्षय नहीं होती।

3देर-चर्म आसन (मृगचर्म — हिरण की खाल)

प्राचीन शास्त्रों में उल्लेखित, किंतु वर्तमान में पशु-संरक्षण के दृष्टिकोण से उपयोग अनुचित। इसके स्थान पर मृगचर्म-रंग का ऊनी आसन उपयोगी।

4सूती आसन

गृहस्थों के लिए स्वच्छ सूती आसन स्वीकार्य।

नियम

  • आसन जमीन पर बिछाएँ
  • शिवलिंग की ओर मुख करके बैठें — पूर्व या उत्तर दिशा
  • आसन का उपयोग केवल पूजा के लिए — दूसरे कार्य में उपयोग न करें
  • आसन को नियमित धूप दिखाएँ और शुद्ध रखें

बैठने की स्थिति

सुखासन या पद्मासन — पीठ सीधी, मेरुदंड सम। आगम शास्त्र: पूजा में पद्मासन या सुखासन में बैठना उत्तम।

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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण, पतञ्जलि योगसूत्र, मनुस्मृति, आगम शास्त्र
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