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शिव पूजा📜 शिव पुराण, योग शास्त्र, कर्मकांड ग्रंथ2 मिनट पठन

शिव की पूजा करते समय किस मुद्रा में बैठना चाहिए?

संक्षिप्त उत्तर

शिव पूजा आसन: पद्मासन (सर्वश्रेष्ठ), सुखासन (सरल), सिद्धासन, वज्रासन। कुश/ऊनी/रेशमी आसन। रीढ़ सीधी, पूर्व/उत्तर मुख। जमीन कठिन हो तो कुर्सी भी उचित। स्थिरता = एकाग्रता।

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विस्तृत उत्तर

शिव पूजा में बैठने की मुद्रा (आसन) का विशेष महत्व है:

उत्तम आसन

  1. 1पद्मासन (कमलासन): सर्वश्रेष्ठ। दोनों पैरों को विपरीत जाँघों पर रखकर बैठें। ध्यान और जप के लिए सबसे उत्तम।
  1. 1सुखासन: सरल — पालथी मारकर आरामदायक मुद्रा में बैठें। जो पद्मासन न लगा सके उनके लिए।
  1. 1सिद्धासन: बायीं एड़ी को मूलाधार पर रखकर बैठें। साधकों के लिए।
  1. 1वज्रासन: दोनों पैरों को पीछे मोड़कर एड़ियों पर बैठें। भोजन के बाद पूजा हो तो उत्तम।

सामान्य नियम

  • कुश (दर्भ) का आसन सर्वोत्तम। ऊनी कम्बल, रेशमी कपड़ा भी उचित।
  • जमीन पर सीधे न बैठें — आसन अवश्य बिछाएँ।
  • रीढ़ की हड्डी सीधी रखें — झुककर न बैठें।
  • मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर।
  • शिवलिंग के सामने बैठें, पीठ शिवलिंग की ओर न हो।

विकल्प: यदि जमीन पर बैठना कठिन हो (वृद्ध, रोगी) तो कुर्सी या पटिये पर भी बैठ सकते हैं — भक्ति में शारीरिक बाधा नहीं आनी चाहिए।

विशेष: पूजा में आसन = स्थिरता। जितना स्थिर आसन, उतनी एकाग्रता। बार-बार हिलना-डुलना, पैर बदलना — इससे बचें।

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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण, योग शास्त्र, कर्मकांड ग्रंथ
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