विस्तृत उत्तर
शिव पूजा में बैठने की मुद्रा (आसन) का विशेष महत्व है:
उत्तम आसन
- 1पद्मासन (कमलासन): सर्वश्रेष्ठ। दोनों पैरों को विपरीत जाँघों पर रखकर बैठें। ध्यान और जप के लिए सबसे उत्तम।
- 1सुखासन: सरल — पालथी मारकर आरामदायक मुद्रा में बैठें। जो पद्मासन न लगा सके उनके लिए।
- 1सिद्धासन: बायीं एड़ी को मूलाधार पर रखकर बैठें। साधकों के लिए।
- 1वज्रासन: दोनों पैरों को पीछे मोड़कर एड़ियों पर बैठें। भोजन के बाद पूजा हो तो उत्तम।
सामान्य नियम
- ▸कुश (दर्भ) का आसन सर्वोत्तम। ऊनी कम्बल, रेशमी कपड़ा भी उचित।
- ▸जमीन पर सीधे न बैठें — आसन अवश्य बिछाएँ।
- ▸रीढ़ की हड्डी सीधी रखें — झुककर न बैठें।
- ▸मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर।
- ▸शिवलिंग के सामने बैठें, पीठ शिवलिंग की ओर न हो।
विकल्प: यदि जमीन पर बैठना कठिन हो (वृद्ध, रोगी) तो कुर्सी या पटिये पर भी बैठ सकते हैं — भक्ति में शारीरिक बाधा नहीं आनी चाहिए।
विशेष: पूजा में आसन = स्थिरता। जितना स्थिर आसन, उतनी एकाग्रता। बार-बार हिलना-डुलना, पैर बदलना — इससे बचें।





