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शिव पूजा⏱ 2 मिनट पठन

शिव पूजा के दौरान कौन सा मंत्र जपें?

शिव पूजा मंत्र: पंचाक्षरी 'ॐ नमः शिवाय' — सर्वश्रेष्ठ, पाँच तत्त्वों के प्रतीक। महामृत्युंजय (ऋग्वेद 7. 59. 12) — रोग-मृत्यु-भय। श्री रुद्रम् (तैत्तिरीय संहिता 4.

संक्षिप्त उत्तर

शिव पूजा मंत्र: पंचाक्षरी 'ॐ नमः शिवाय' — सर्वश्रेष्ठ, पाँच तत्त्वों के प्रतीक। महामृत्युंजय (ऋग्वेद 7.59.12) — रोग-मृत्यु-भय। श्री रुद्रम् (तैत्तिरीय संहिता 4.5) — उन्नत। शिव तांडव स्तोत्र — भक्ति। नित्य 108 जप। महामृत्युंजय 11 या 108 बार।

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विस्तृत उत्तर

शिव पूजा के दौरान जपे जाने वाले मंत्रों का वर्गीकरण उद्देश्य और साधक की पात्रता के अनुसार शास्त्रों में किया गया है।

1पंचाक्षरी मंत्र — 'ॐ नमः शिवाय' (सर्वश्रेष्ठ और सर्वसुलभ)

शिव पुराण: यह मंत्र समस्त वेदों का सार है। पाँच अक्षर = पाँच तत्त्व:

  • ▸नमः = पृथ्वी
  • ▸शि = जल
  • ▸वा = अग्नि
  • ▸य = वायु
  • ▸ॐ = आकाश

2महामृत्युंजय मंत्र (ऋग्वेद 7.59.12)

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।

उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।'

रोग, भय, दुर्घटना और मृत्यु-भय निवारण के लिए।

3शिव-षडक्षर मंत्र — 'ॐ नमः शिवाय' (ॐ सहित 6 अक्षर)

ॐ' प्रणव के साथ — अधिक शक्तिशाली रूप।

4श्री रुद्रम् (तैत्तिरीय संहिता 4.5) — उन्नत साधकों के लिए।

5शिव तांडव स्तोत्र (रावण-रचित)

जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले...' — भक्ति और स्तुति के लिए।

6शिव महिम्न स्तोत्र (पुष्पदंत-रचित)

महिम्नः पारं ते परमविदुषो यद्यसदृशी...' — उन्नत भक्तों के लिए।

जप-संख्या: 108 = एक माला। 1008 = विशेष अनुष्ठान। नित्य न्यूनतम 108 बार।

उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

शिव पूजा के दौरान कौन सा मंत्र जपें को संदर्भ सहित समझें

शिव पूजा के दौरान कौन सा मंत्र जपें का सबसे सीधा सार यह है: शिव पूजा मंत्र: पंचाक्षरी 'ॐ नमः शिवाय' — सर्वश्रेष्ठ, पाँच तत्त्वों के प्रतीक। महामृत्युंजय (ऋग्वेद 7.59.12) — रोग-मृत्यु-भय। श्री रुद्रम् (तैत्तिरीय संहिता 4.5) — उन्नत। शिव तांडव स्तोत्र...

शिव पूजा जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.

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