विस्तृत उत्तर
शिव पूजा के दौरान जपे जाने वाले मंत्रों का वर्गीकरण उद्देश्य और साधक की पात्रता के अनुसार शास्त्रों में किया गया है।
1पंचाक्षरी मंत्र — 'ॐ नमः शिवाय' (सर्वश्रेष्ठ और सर्वसुलभ)
शिव पुराण: यह मंत्र समस्त वेदों का सार है। पाँच अक्षर = पाँच तत्त्व:
- ▸नमः = पृथ्वी
- ▸शि = जल
- ▸वा = अग्नि
- ▸य = वायु
- ▸ॐ = आकाश
2महामृत्युंजय मंत्र (ऋग्वेद 7.59.12)
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।'
रोग, भय, दुर्घटना और मृत्यु-भय निवारण के लिए।
3शिव-षडक्षर मंत्र — 'ॐ नमः शिवाय' (ॐ सहित 6 अक्षर)
ॐ' प्रणव के साथ — अधिक शक्तिशाली रूप।
4श्री रुद्रम् (तैत्तिरीय संहिता 4.5) — उन्नत साधकों के लिए।
5शिव तांडव स्तोत्र (रावण-रचित)
जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले...' — भक्ति और स्तुति के लिए।
6शिव महिम्न स्तोत्र (पुष्पदंत-रचित)
महिम्नः पारं ते परमविदुषो यद्यसदृशी...' — उन्नत भक्तों के लिए।
जप-संख्या: 108 = एक माला। 1008 = विशेष अनुष्ठान। नित्य न्यूनतम 108 बार।





