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शिव पूजा📜 शिव पुराण (विद्येश्वर संहिता), आगम शास्त्र (कामिकागम), धर्मसिंधु2 मिनट पठन

शिव पूजा के दौरान क्या नहीं करना चाहिए?

संक्षिप्त उत्तर

शिव पूजा में वर्जित: तुलसी (निषिद्ध), केवड़ा (शापित), टूटे पुष्प, भैंस का दूध, बासी भोग। जूते पहनकर न बैठें। पूजा में बात/हँसी नहीं। पूर्ण परिक्रमा नहीं — केवल अर्धपरिक्रमा। सूतक/ग्रहण में पूजा नहीं। क्रोध-लोभ की अवस्था में पूजा व्यर्थ।

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विस्तृत उत्तर

शिव पूजा में वर्जित कार्यों का विस्तृत विधान शिव पुराण और आगम शास्त्रों में दिया गया है।

शिव पूजा में निषिद्ध कार्य

1अर्पण-संबंधी वर्जन

  • तुलसी — शिवलिंग पर तुलसी कभी न चढ़ाएँ (विष्णु-प्रिय, शिव पुराण में स्पष्ट निषेध)
  • केवड़ा (केतकी) — शापित पुष्प, सख्त वर्जित
  • टूटे/मुरझाए पुष्प — वर्जित
  • भैंस का दूध — तामसिक, वर्जित
  • बासी/जूठा भोग — वर्जित

2आचरण-संबंधी वर्जन

  • जूते-चप्पल पहनकर पूजा — वर्जित
  • पूजा के दौरान बात करना/हँसना — मन की एकाग्रता भंग होती है
  • पीठ करके बैठना — शिवलिंग की ओर पीठ न करें
  • शिवलिंग को छूना (महिलाएँ) — कुछ परंपराओं और मंदिरों में निषेध (यह क्षेत्रीय परंपरा-भेद है)

3विधि-संबंधी वर्जन

  • अर्धपरिक्रमा का उल्लंघन — शिवलिंग की पूर्ण परिक्रमा न करें; केवल अर्धपरिक्रमा करें (जलधारी पार न करें)
  • सूतक/पातक में पूजा — अशौच काल में स्वयं पूजा न करें
  • ग्रहण काल में — ग्रहण-स्पर्श से मोक्ष-काल तक पूजा बंद

4मनःस्थिति-संबंधी

  • क्रोध, लोभ, मद की अवस्था में पूजा अनुचित
  • किसी की बुराई सोचते हुए पूजा — फल नहीं

आगम शास्त्र: पूजा का फल भावना पर निर्भर है — शुद्ध मन से पूजा ही सफल होती है।

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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण (विद्येश्वर संहिता), आगम शास्त्र (कामिकागम), धर्मसिंधु
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