विस्तृत उत्तर
शिव पूजा में वर्जित कार्यों का विस्तृत विधान शिव पुराण और आगम शास्त्रों में दिया गया है।
शिव पूजा में निषिद्ध कार्य
1अर्पण-संबंधी वर्जन
- ▸तुलसी — शिवलिंग पर तुलसी कभी न चढ़ाएँ (विष्णु-प्रिय, शिव पुराण में स्पष्ट निषेध)
- ▸केवड़ा (केतकी) — शापित पुष्प, सख्त वर्जित
- ▸टूटे/मुरझाए पुष्प — वर्जित
- ▸भैंस का दूध — तामसिक, वर्जित
- ▸बासी/जूठा भोग — वर्जित
2आचरण-संबंधी वर्जन
- ▸जूते-चप्पल पहनकर पूजा — वर्जित
- ▸पूजा के दौरान बात करना/हँसना — मन की एकाग्रता भंग होती है
- ▸पीठ करके बैठना — शिवलिंग की ओर पीठ न करें
- ▸शिवलिंग को छूना (महिलाएँ) — कुछ परंपराओं और मंदिरों में निषेध (यह क्षेत्रीय परंपरा-भेद है)
3विधि-संबंधी वर्जन
- ▸अर्धपरिक्रमा का उल्लंघन — शिवलिंग की पूर्ण परिक्रमा न करें; केवल अर्धपरिक्रमा करें (जलधारी पार न करें)
- ▸सूतक/पातक में पूजा — अशौच काल में स्वयं पूजा न करें
- ▸ग्रहण काल में — ग्रहण-स्पर्श से मोक्ष-काल तक पूजा बंद
4मनःस्थिति-संबंधी
- ▸क्रोध, लोभ, मद की अवस्था में पूजा अनुचित
- ▸किसी की बुराई सोचते हुए पूजा — फल नहीं
आगम शास्त्र: पूजा का फल भावना पर निर्भर है — शुद्ध मन से पूजा ही सफल होती है।





