विस्तृत उत्तर
शिव मंदिर में दान की कोई निश्चित राशि शास्त्रों में नहीं बताई गई है। दान श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार होना चाहिए।
शास्त्रीय सिद्धांत
- 1श्रद्धा प्रधान: 'श्रद्धया देयम्' — श्रद्धा से दान दें। राशि छोटी-बड़ी नहीं, भावना महत्वपूर्ण। एक रुपये का दान भी श्रद्धापूर्वक दिया जाए तो करोड़ों से श्रेष्ठ।
- 1यथाशक्ति: 'यथाशक्ति' = अपनी सामर्थ्य के अनुसार। न बहुत कम (कृपणता), न बहुत अधिक (दिखावा/ऋण लेकर)।
- 1विषम संख्या: दक्षिणा/दान विषम संख्या (1, 5, 11, 21, 51, 101) में देना शुभ माना जाता है।
- 1नियमित दान: बड़ी राशि एक बार देने से बेहतर है छोटी-छोटी राशि नियमित रूप से दान करना।
दान कहाँ जाए
- ▸मंदिर रखरखाव, पुजारी दक्षिणा, अन्नदान, गरीबों की सहायता।
- ▸मंदिर का दान पात्र = देव दक्षिणा।
भगवान शिव और दान
शिव स्वयं 'आशुतोष' (शीघ्र प्रसन्न होने वाले) हैं। उन्हें धन-दौलत नहीं, भक्ति चाहिए। 'पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति' — एक पत्ता, फूल, फल, जल भी भक्ति से दिया जाए तो शिव प्रसन्न होते हैं।
विशेष: दान कभी जबरदस्ती या दिखावे के लिए न करें। मंदिर में पुजारी द्वारा अत्यधिक दक्षिणा का दबाव डालना अनुचित है — श्रद्धानुसार ही दें।





