विस्तृत उत्तर
शिव मंदिर में शिवलिंग दर्शन की संख्या पर शास्त्रों और परम्पराओं में विभिन्न मत हैं:
प्रचलित मान्यता
लोक परम्परा में कहा जाता है कि एक बार में केवल एक शिवलिंग के दर्शन करने चाहिए। 'दो शिवलिंग = दो शिव = शिव अद्वितीय हैं, उन्हें विभाजित करना अशुभ' — ऐसी लोक मान्यता है।
शास्त्रीय दृष्टिकोण
शिव पुराण में ऐसा कोई स्पष्ट निषेध नहीं मिलता कि एक से अधिक शिवलिंग के दर्शन नहीं करने चाहिए। शिव सर्वव्यापक हैं — प्रत्येक शिवलिंग में एक ही शिव विराजमान हैं। काशी (वाराणसी) में सैकड़ों शिवलिंग हैं और भक्त एक ही यात्रा में अनेक शिवलिंगों के दर्शन करते हैं।
व्यावहारिक सुझाव
- 1यदि आपकी कुल परम्परा में एक शिवलिंग का नियम है — उसका पालन करें।
- 2शास्त्रीय आधार पर एक से अधिक शिवलिंग के दर्शन में कोई दोष नहीं।
- 3प्रत्येक शिवलिंग में एक ही शिव देखें — भिन्नता मत मानें।
- 4दो शिवलिंगों को एक साथ (एक हाथ से दोनों पर) जल/पुष्प न चढ़ाएँ — एक-एक करके पूजन करें।
विशेष: कुछ विद्वान कहते हैं कि 'दो शिवलिंग' का निषेध उन स्थानों पर है जहाँ एक ही मंदिर/गर्भगृह में दो शिवलिंग स्थापित हों — दो अलग-अलग मंदिरों में दर्शन करने में कोई दोष नहीं।





