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वर्जित प्रश्नोत्तरी — 37 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित वर्जित विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 37 प्रश्न

तिथि शास्त्र

एकादशी को कौन से काम न करें?

एकादशी=विष्णु व्रत। न करें: अन्न(चावल विशेष), मांस, दिन सोना, क्रोध, झूठ। करें: विष्णु पूजा, गीता, व्रत, जप, दान। उपवास+भक्ति दिन।

एकादशीवर्जितव्रत
दैनिक कर्म

तुलसी पत्ते तोड़ने के नियम?

न तोड़ें: रविवार, एकादशी, द्वादशी, संक्रांति, रात। कैसे: सुबह, शुद्ध हाथ, 'ॐ तुलस्यै नमः'+क्षमा, दाहिना हाथ, जरूरत जितने। पहले दिन तोड़कर रखें।

तुलसीपत्तेनियम
गणेश पूजा नियम

गणेश जी को तुलसी क्यों नहीं चढ़ाई जाती?

तुलसी ने विवाह प्रस्ताव → गणेश ने मना → तुलसी शाप → गणेश प्रति-शाप: 'मेरी पूजा में तुम वर्जित।' गणेश = दूर्वा; विष्णु = तुलसी। कुछ दक्षिण परंपरा में मान्य।

तुलसीगणेशवर्जित
दिव्यास्त्र

संवर्त अस्त्र को महाकाव्यों के सबसे भयावह अस्त्रों में क्यों गिना जाता है?

संवर्त अस्त्र को भयावह इसलिए माना जाता है क्योंकि यह अस्तित्व को मिटा देता है, इसके एकमात्र प्रयोग में पलक झपकते तीन करोड़ का संहार हुआ और देवताओं को भी ऐसा संहार याद नहीं था।

संवर्त अस्त्रभयावहवर्जित
मंत्र जप नियम

मंत्र जप में तर्जनी अंगुली का उपयोग क्यों वर्जित माना गया है?

तर्जनी = अहंकार/धमकाना — जप = अहंकार त्याग। वायु तत्व = चंचलता। नकारात्मक (उंगली दिखाना)। सही: अंगूठा + मध्यमा। तर्जनी मोड़कर/दूर।

तर्जनीवर्जितकारण
मुहूर्त शास्त्र

भद्रा काल क्या है — इसमें कौन से काम न करें?

भद्रा(विष्टि करण)=अशुभ करण। प्रति पक्ष 4 बार। सभी मांगलिक कार्य वर्जित(विवाह/गृहप्रवेश/व्यापार)। मुख=अत्यंत अशुभ, पूँछ=कम। .com→'भद्रा काल'।

भद्राविष्टि करणवर्जित
तिथि शास्त्र

क्षय तिथि क्या है — इसमें कौन से काम न करें?

क्षय तिथि=एक सूर्योदय में समाप्त(नष्ट)। सभी मांगलिक कार्य वर्जित(गृहप्रवेश/विवाह/खरीद)। दान/पूजा/जप मान्य। पंचांग/.com।

क्षय तिथिवर्जितपंचांग
लोक

अष्टमी श्राद्ध में मांस का प्रयोग सही है क्या?

वर्तमान विधान में सात्विक भोजन ही मान्य है।

मांसवर्जितश्राद्ध भोजन
श्राद्ध मुहूर्त

क्या रात में श्राद्ध हो सकता है?

नहीं, रात्रि में श्राद्ध नहीं हो सकता। शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध कर्म कभी भी प्रातःकाल, सूर्यास्त के पश्चात् या रात्रि में नहीं किया जाना चाहिए। वायु पुराण के अनुसार पितरों का समय मध्याह्न के पश्चात् का होता है। सही समय कुतुप, रौहिण और अपराह्न काल है।

रात्रि श्राद्धवर्जितश्राद्ध समय
श्राद्ध मुहूर्त

क्या प्रातःकाल श्राद्ध कर सकते हैं?

नहीं, प्रातःकाल श्राद्ध वर्जित है। शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध कर्म प्रातःकाल, सूर्यास्त के पश्चात् या रात्रि में नहीं किया जाना चाहिए। वायु पुराण के अनुसार पितरों का समय मध्याह्न के पश्चात् का होता है। सही समय कुतुप, रौहिण और अपराह्न काल है।

प्रातःकालश्राद्ध समयवर्जित
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

सूतक काल में ब्राह्मण भोजन क्यों वर्जित है?

ब्राह्मण भोजन सूतक में वर्जित है क्योंकि यह अवधि प्रेतकर्म और सद्गति पर केंद्रित होती है।

सूतक कालब्राह्मण भोजनवर्जित
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

सूतक काल में वेद स्वाध्याय क्यों वर्जित है?

वेद स्वाध्याय सूतक काल में इसलिए वर्जित है ताकि परिवार प्रेतकर्मों पर ध्यान दे।

सूतक कालवेद स्वाध्यायवर्जित
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

सूतक काल में संध्या-वंदन क्यों रोका जाता है?

संध्या-वंदन सूतक काल में इसलिए रोका जाता है ताकि परिवार प्रेत की सद्गति पर केंद्रित रहे।

सूतक कालसंध्या वंदनवर्जित
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

सूतक काल में सार्वजनिक संपर्क क्यों वर्जित है?

सार्वजनिक संपर्क इसलिए वर्जित है ताकि परिजन अशौच काल में प्रेत की सद्गति पर ध्यान दें।

सूतक कालसार्वजनिक संपर्कवर्जित
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

सूतक काल में पलंग पर सोना क्यों वर्जित है?

सूतक काल में पलंग पर सोना वर्जित है क्योंकि यह समय प्रेत की सद्गति पर केंद्रित रहने का है।

सूतक कालपलंगशयन
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

सूतक काल में आशीर्वाद देना क्यों वर्जित है?

सूतक काल में आशीर्वाद देना इसलिए वर्जित है ताकि परिजन प्रेत की सद्गति पर ध्यान दें।

सूतक कालआशीर्वादवर्जित
सावधानियाँ और नियम

बिना गुरु के असितांग भैरव साधना करने पर क्या होता है?

बिना गुरु के मंत्र शक्तिहीन होते हैं या विपरीत परिणाम देते हैं — बिना गुरु की अनुमति के इस साधना का प्रयास पूर्णतः वर्जित है।

बिना गुरुशक्तिहीन मंत्रविपरीत परिणाम
सावधानियाँ

चन्द्रशेखराष्टकम् का तामसिक उद्देश्य से पाठ करना सही है क्या?

नहीं — यह स्तुति दिव्य कल्याण के लिए है। लोभ, प्रतिशोध या हानि पहुँचाने के लिए इसका उपयोग वर्जित है — ऐसे में लाभ नहीं मिलता और मानसिक शांति भंग रहती है।

तामसिक उद्देश्यवर्जितनकारात्मक
सावधानियाँ और वर्जित सामग्री

रुद्राभिषेक में खंडित अक्षत क्यों नहीं चढ़ाते?

खंडित (टूटे हुए) अक्षत रुद्राभिषेक में वर्जित हैं — पूजा में सदैव अखंड (साबुत) चावल का ही प्रयोग करना चाहिए, वरना पूजा का फल नष्ट हो सकता है।

खंडित अक्षतटूटे चावलवर्जित
सावधानियाँ और वर्जित सामग्री

रुद्राभिषेक में शंख से अभिषेक क्यों नहीं करते?

रुद्राभिषेक में शंख से अभिषेक सामान्यतः वर्जित है — यह वर्जित सामग्रियों में उल्लेखित है और इसका प्रयोग पूजा का फल नष्ट कर सकता है।

शंख अभिषेकवर्जितरुद्राभिषेक नियम
सावधानियाँ और वर्जित सामग्री

शिवलिंग पर हल्दी क्यों नहीं चढ़ाते?

शिवलिंग पर हल्दी वर्जित है — यह रुद्राभिषेक की वर्जित सामग्रियों में स्पष्ट रूप से उल्लेखित है। इसके स्थान पर चंदन या अष्टगंध चढ़ाएं।

हल्दीशिवलिंग निषेधवर्जित
रुद्राभिषेक का सही समय

शिव वास श्मशान में होने पर रुद्राभिषेक करना चाहिए क्या?

नहीं — श्मशान वास (सप्तमी, चतुर्दशी) पर सकाम रुद्राभिषेक पूर्णतः वर्जित है। यह कामना पूर्ति के लिए फलदायी नहीं है बल्कि संकटकारी हो सकता है।

श्मशान वासवर्जितसप्तमी चतुर्दशी
पंचांग एवं कैलेंडर

खरमास क्या है इसमें कौन से काम वर्जित

खरमास = सूर्य धनु/मीन राशि (~दिसंबर-जनवरी + मार्च-अप्रैल)। गुरु कमजोर → शुभ कार्य वर्जित (विवाह/गृह प्रवेश)। पूजा/दान/दैनिक = अनुमत। अधिक मास से भिन्न।

खरमासमलमासवर्जित
पंचांग एवं कैलेंडर

अधिक मास में विवाह क्यों नहीं करते

अधिक मास = मलमास (अशुद्ध); कोई देवता अधिपति नहीं। विवाह/गृह प्रवेश/संस्कार वर्जित। पुण्य कर्म (दान/व्रत/भक्ति) = विशेष शुभ। ~32.5 माह में एक बार।

अधिक मासविवाहवर्जित

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।