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विस्तृत उत्तर
सूतक काल में पलंग या शय्या पर शयन करना वर्जित बताया गया है। गरुड़ पुराण में सूतक काल में आशीर्वाद देना, देव-प्रतिमाओं की पूजा करना, पलंग या शय्या पर सोना और सार्वजनिक संपर्क निषिद्ध बताए गए हैं। मृत्यु के बाद यह समय प्रेत की सद्गति और उसके पारलौकिक देह-निर्माण पर ध्यान देने का होता है। इसलिए परिजनों को सांसारिक सुविधाओं और सामान्य व्यवहार से विरत रहने का निर्देश दिया गया है।
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