विस्तृत उत्तर
भद्रा (विष्टि करण) = पंचांग का एक अशुभ करण — सूर्य की बहन।
कब: प्रत्येक पक्ष (15 दिन) में 4 बार भद्रा आती है — तिथि+करण के आधार पर। कृष्ण चतुर्थी, एकादशी; शुक्ल तृतीया, दशमी आदि।
वर्जित: विवाह, मुंडन, गृहप्रवेश, तीर्थयात्रा, नया व्यापार — सभी मांगलिक कार्य।भद्रा मुख/पूँछ: भद्रा का मुख=अत्यंत अशुभ, मध्य=मध्यम, पूँछ=कम अशुभ (कुछ में शुभ भी)।
कैसे देखें: .com → 'भद्रा काल' — तिथि+समय सहित। पंचांग में 'विष्टि' करण चिह्नित।
विशेष: रक्षाबंधन भद्रा में हो तो भद्रा पूँछ में राखी बांधें।





