विस्तृत उत्तर
क्षय तिथि = जब एक तिथि एक सूर्योदय में समाप्त हो जाती है — अर्थात वह तिथि किसी भी सूर्योदय पर विद्यमान नहीं रहती। दो सूर्योदय के बीच 'क्षय' (नष्ट) हो जाती है।
अशुभ क्यों: क्षय = नाश/हानि — अस्थिर ऊर्जा।
न करें: गृहप्रवेश, विवाह, मुंडन, नामकरण, नया व्यापार, भूमि खरीद, सोना खरीद — कोई भी मांगलिक कार्य वर्जित।
कर सकते हैं: दान, पूजा, जप, व्रत, तर्पण — धार्मिक कार्य।
कैसे देखें: पंचांग/.com में 'क्षय तिथि' चिह्नित होती है।





