विस्तृत उत्तर
पुष्य 27 नक्षत्रों में अष्टम नक्षत्र है। यह कर्क राशि में 3°20' से 16°40' तक विस्तृत है। इसे नक्षत्रों में सर्वश्रेष्ठ और 'नक्षत्रों का राजा' कहा गया है।
नाम और प्रतीक — 'पुष्य' = पोषण करना, फूलना-फलना। इसका प्रतीक 'गाय का थन' या 'कमल का फूल' है। यह पोषण, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का नक्षत्र है।
स्वामी ग्रह — शनि। देवता — बृहस्पति (देवगुरु)।
राशि — कर्क। स्वभाव — देव गण। वर्ण — क्षत्रिय। तत्व — जल।
चरण — 4 चरण। मेष, वृषभ, मिथुन और कर्क नवांश में।
मुहूर्त फल — अत्यंत शुभ। गुरुवार को पुष्य नक्षत्र का संयोग 'गुरु-पुष्य योग' कहलाता है जो सर्वोत्कृष्ट मुहूर्त है। सोना-चाँदी खरीदना, नया वाहन, व्यापार, दवा और सभी शुभ कार्यों के लिए अत्युत्तम। यद्यपि पुराण-शास्त्रों में विवाह के लिए इसे वर्जित माना है।
जन्म-फल — पुष्य में जन्मे व्यक्ति परोपकारी, स्नेही, धार्मिक और बुद्धिमान होते हैं। ये समाज में सम्मान पाते हैं। इनका व्यवहार सरल और ह्रदय उदार होता है। आर्थिक स्थिति सामान्यतः अच्छी रहती है। ये दीर्घायु और सुखी होते हैं।
स्वास्थ्य — पेट, छाती और फेफड़ों का ध्यान रखें।
करियर — शिक्षण, चिकित्सा, व्यापार, धर्म-प्रचार और समाज-सेवा में विशेष सफलता।





