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अश्विनी नक्षत्र क्या होता है?

अश्विनी 27 नक्षत्रों में प्रथम। मेष राशि 0°–13°20'। स्वामी केतु, देवता अश्विनी कुमार। प्रतीक अश्व-मुख। यात्रा-चिकित्सा के लिए शुभ, विवाह वर्जित।

संक्षिप्त उत्तर

अश्विनी 27 नक्षत्रों में प्रथम। मेष राशि 0°–13°20'। स्वामी केतु, देवता अश्विनी कुमार। प्रतीक अश्व-मुख। यात्रा-चिकित्सा के लिए शुभ, विवाह वर्जित। जन्म में तेजस्वी, साहसी, चिकित्सा-कुशल।

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विस्तृत उत्तर

अश्विनी 27 नक्षत्रों में प्रथम नक्षत्र है। यह मेष राशि में 0° से 13°20' तक विस्तृत है।

नाम और प्रतीक — 'अश्विनी' का अर्थ है अश्वों की पुत्री। इसका प्रतीक चिह्न 'घोड़े का मुख' है। यह गति, शीघ्रता और चिकित्सा का नक्षत्र है।

स्वामी ग्रह — केतु। देवता — अश्विनी कुमार (देवताओं के वैद्य)।

राशि — मेष। स्वभाव — देव गण। वर्ण — वैश्य। तत्व — पृथ्वी।

चरण — इस नक्षत्र के 4 चरण हैं, जो क्रमशः मेष, वृषभ, मिथुन और कर्क नवांश में पड़ते हैं।

मुहूर्त फल — यात्रा प्रारंभ, चिकित्सा, वाहन खरीदना, नई परियोजना और युद्ध के लिए अनुकूल। विवाह के लिए वर्जित।

जन्म-फल — अश्विनी नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति तेजस्वी, बुद्धिमान, चंचल और साहसी होते हैं। ये शीघ्र निर्णय लेते हैं। चिकित्सा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में विशेष सफलता। स्वभाव से स्वतंत्रप्रिय और आत्मनिर्भर। रूप-रंग आकर्षक होता है।

स्वास्थ्य — सिर और मस्तिष्क से संबंधित रोगों का ध्यान रखें।

करियर — चिकित्सा, खेल, सेना, इंजीनियरिंग और उद्यमिता में सफलता।

उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

अश्विनी नक्षत्र क्या होता है को संदर्भ सहित समझें

अश्विनी नक्षत्र क्या होता है का सबसे सीधा सार यह है: अश्विनी 27 नक्षत्रों में प्रथम। मेष राशि 0°–13°20'। स्वामी केतु, देवता अश्विनी कुमार। प्रतीक अश्व-मुख। यात्रा-चिकित्सा के लिए शुभ, विवाह वर्जित। जन्म में तेजस्वी, साहसी, चिकित्सा-कुशल।

पंचांग एवं ज्योतिष जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.

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