विस्तृत उत्तर
पुनर्वसु 27 नक्षत्रों में सप्तम नक्षत्र है। यह मिथुन राशि में 20° से 30° और कर्क राशि में 0° से 3°20' तक विस्तृत है। भगवान राम का जन्म नक्षत्र भी पुनर्वसु माना जाता है।
नाम और प्रतीक — 'पुनर्वसु' = पुनः वास करना, लौटना। इसका प्रतीक 'धनुष और तरकश' है। यह पुनरुद्धार, आशा और नवीनीकरण का नक्षत्र है।
स्वामी ग्रह — बृहस्पति। देवता — अदिति (देवों की माता)।
राशि — मिथुन/कर्क। स्वभाव — देव गण। वर्ण — वैश्य। तत्व — जल।
चरण — 4 चरण। पहले तीन चरण मिथुन में, चौथा कर्क में।
मुहूर्त फल — यात्रा, व्यापार, विद्यारंभ, गृह प्रवेश और दान के लिए अत्यंत शुभ। नए आरंभ के लिए उत्तम।
जन्म-फल — पुनर्वसु में जन्मे व्यक्ति उदार, सरल, आध्यात्मिक और संतोषी होते हैं। ये कठिनाइयों के बाद भी हार नहीं मानते और पुनः उठ खड़े होते हैं। इनका स्वभाव मृदु, क्षमाशील और सहृदय होता है। ज्ञान और विद्या में विशेष रुचि होती है।
स्वास्थ्य — फेफड़े, यकृत और पाचन पर ध्यान दें।
करियर — शिक्षण, लेखन, चिकित्सा, आध्यात्मिक मार्गदर्शन और व्यापार में सफलता।
