विस्तृत उत्तर
मूल 27 नक्षत्रों में एकोनविंश (19वाँ) नक्षत्र है। यह धनु राशि में 0° से 13°20' तक विस्तृत है।
नाम और प्रतीक — 'मूल' = जड़, आधार। इसका प्रतीक 'बँधी हुई जड़ें' है। यह गहराई, खोज और जड़ों तक पहुँचने का नक्षत्र है।
स्वामी ग्रह — केतु। देवता — निर्रति (विनाश की देवी)।
राशि — धनु। स्वभाव — राक्षस गण। वर्ण — कसाई। तत्व — अग्नि।
चरण — 4 चरण। मेष, वृषभ, मिथुन और कर्क नवांश में।
मुहूर्त फल — खनन, खुदाई, वनस्पति-औषधि, शोध और गहराई से जाँच-पड़ताल के लिए अनुकूल। शुभ कार्यों के लिए सावधानी आवश्यक।
जन्म-फल — मूल नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति गहरे विचारक, जिज्ञासु और परिवर्तनकारी होते हैं। ये मूल (जड़) तक पहुँचने की क्षमता रखते हैं। जीवन में परिवर्तन और उलटफेर होते हैं परंतु ये हर बार और मजबूत होकर उठते हैं। दर्शन और आध्यात्म में रुचि होती है। विशेष ज्योतिषीय उपचार से जीवन की बाधाएं कम होती हैं।
स्वास्थ्य — कूल्हे, जाँघ और तंत्रिका-तंत्र पर ध्यान दें।
करियर — अनुसंधान, चिकित्सा, दर्शन, रसायन और आध्यात्मिक मार्गदर्शन में सफलता।





