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नवग्रह चालीसा: शनि-राहु शांत, दुर्भाग्य नाश और राजयोग !
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नवग्रह चालीसा: शनि-राहु शांत, दुर्भाग्य नाश और राजयोग !

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अंतिम अपडेट: 8 जनवरी 2026
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श्री नवग्रह चालीसा: संपूर्ण मूल पाठ | 9 ग्रहों की शांति, कुंडली दोष निवारण और सिद्ध अनुष्ठान विधि

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श्री नवग्रह चालीसा: संपूर्ण पाठ, अनुष्ठान विधि एवं ज्योतिषीय शोध प्रतिवेदन | Navgraha Chalisa

श्री नवग्रह चालीसा: मूल पाठ, ऐतिहासिक उद्गम, साहित्यिक विश्लेषण एवं अनुष्ठान विधि पर विस्तृत शोध प्रतिवेदन

1. श्री नवग्रह चालीसा: संपूर्ण मूल पाठ

॥ श्री नवग्रह चालीसा ॥ ॥ दोहा ॥ श्री गणपति गुरुपद कमल, प्रेम सहित सिर नाय। नवग्रह चालीसा कहत, शारद होत सहाय॥ जय जय रवि शशि सोम बुध, जय गुरु भृगु शनि राज। जयति राहु अरु केतु ग्रह, करहु अनुग्रह आज॥ ॥ अथ श्री सूर्य स्तुति ॥ प्रथमहि रवि कहूँ नावौं माथा, करहु कृपा जन जानि अनाथा। हे आदित्य दिवाकर भानू, मैं मति मन्द महा अज्ञानू। अब निज जन कहूँ हरहु कलेशा, दिनकर द्वादश रूप दिनेशा। नमो भास्कर सूर्य प्रभाकर, अर्क मित्र अघ ओघ क्षमाकर॥ ॥ अथ श्री चन्द्र स्तुति ॥ शशि मयंक रजनीपति स्वामी, चन्द्र कलानिधि नमो नमामि। राकापति हिमांशु राकेशा, प्रणवत जन तन हरहु कलेशा। सोम इन्दु विधु शान्ति सुधाकर, शीत रश्मि औषधि निशाकर। तुम्हीं शोभित सुन्दर भाल महेशा, शरण शरण जन हरहु कलेशा॥ ॥ अथ श्री मंगल स्तुति ॥ जय जय जय मंगल सुखदाता, लोहित भौमादिक विख्याता। अंगारक कुज रुज ऋणहारी, करहु दया यही विनय हमारी। हे महिसुत छितिसुत सुखराशी, लोहितांग जय जन अघनाशी। अगम अमंगल अब हर लीजै, सकल मनोरथ पूरण कीजै॥ ॥ अथ श्री बुध स्तुति ॥ जय शशि नन्दन बुध महाराजा, करहु सकल जन कहूँ शुभ काजा। दीजै बुद्धि बल सुमति सुजाना, कठिन कष्ट हरि करि कल्याणा। हे तारासुत रोहिणी नन्दन, चन्द्रसुवन दुख द्वन्द्व निकन्दन। पूजहुँ आस दास कहूँ स्वामी, प्रणत पाल प्रभु नमो नमामि॥ ॥ अथ श्री बृहस्पति स्तुति ॥ जयति जयति जय श्री गुरुदेवा, करूँ सदा तुम्हरी प्रभु सेवा। देवाचार्य तुम देव गुरु ज्ञानी, इन्द्र पुरोहित विद्यादानी। वाचस्पति बागीश उदारा, जीव बृहस्पति नाम तुम्हारा। विद्या सिन्धु अंगिरा नामा, करहु सकल विधि पूरण कामा॥ ॥ अथ श्री शुक्र स्तुति ॥ शुक्र देव पद तल जल जाता, दास निरन्जन ध्यान लगाता। हे उशना भार्गव भृगु नन्दन, दैत्य पुरोहित दुष्ट निकन्दन। भृगु कुल भूषण दूषण हारी, हरहु नेष्ट ग्रह करहु सुखारी। तुहि द्विजवर जोशी सिरताजा, नर शरीर के तुम्हीं राजा॥ ॥ अथ श्री शनि स्तुति ॥ जय श्री शनिदेव रवि नन्दन, जय कृष्णो सौरी जगवन्दन। पिंगल मन्द रौद्र यम नामा, वप्र आदि कोणस्थ ललामा। वक्र दृष्टि पिप्पल तन साजा, क्षण महुँ करत रंक क्षण राजा। ललत स्वर्ण पद करत निहाला, हरहु विपत्ति छाया के लाला॥ ॥ अथ श्री राहु स्तुति ॥ जय जय राहु गगन प्रविसैया, तुमही चन्द्र आदित्य ग्रसैया। रवि शशि अरि स्वर्भानु धारा, शिखी आदि बहु नाम तुम्हारा। सैहिंकेय तुम निशाचर राजा, अर्धकाय जग राखहु लाजा। यदि ग्रह समय पाय हुँ आवहु, सदा शान्ति और सुख उपजावहु॥ ॥ अथ श्री केतु स्तुति ॥ जय श्री केतु कठिन दुखहारी, करहु सुजन हित मंगलकारी। ध्वजयुत रुण्ड रूप विकराला, घोर रौद्रतन अघमन काला। शिखी तारिका ग्रह बलवाना, महा प्रताप न तेज ठिकाना। वाहन मीन महा शुभकारी, दीजै शान्ति दया उर धारी॥ ॥ नवग्रह शान्ति फल (रचना संदर्भ) ॥ तीरथराज प्रयाग सुपासा, बसै राम के सुन्दर दासा। ककरा ग्रामहिं पुरे-तिवारी, दुर्वासाश्रम जन दुख हारी। नवग्रह शान्ति लिख्यो सुख हेतु, जन तन कष्ट उतारण सेतू। जो नित पाठ करै चित लावै, सब सुख भोगि परम पद पावै॥ ॥ दोहा ॥ धन्य नवग्रह देव प्रभु, महिमा अगम अपार। चित नव मंगल मोद गृह, जगत जनन सुखद्वार॥ यह चालीसा नवोग्रह, विरचित सुन्दरदास। पढ़त प्रेम युत बढ़त सुख, सर्वानन्द हुलास॥ ॥ इति श्री नवग्रह चालीसा सम्पूर्ण ॥

2. अनुष्ठान विधि: श्रद्धा, नियम और पाठ प्रक्रिया

2.1 पूर्व तैयारी और नियम
विषय निर्देश
पवित्रतापाठ से पूर्व स्नान अनिवार्य है। स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
वस्त्र का रंगरविवार को लाल, सोमवार को सफेद, मंगलवार को लाल, बुधवार को हरा, गुरुवार को पीला, शुक्रवार को सफेद, शनिवार को काला/नीला। यदि नित्य पाठ कर रहे हैं, तो सफेद या केसरिया वस्त्र सर्वोत्तम हैं।
दिशापूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर मुख करके बैठना सर्वश्रेष्ठ है। विशेष ग्रह शांति के लिए उस ग्रह की दिशा (जैसे शनि के लिए पश्चिम) का प्रयोग हो सकता है, परंतु नवग्रह चालीसा के लिए पूर्व दिशा मानक है।
आसनऊनी आसन या कुशा का आसन प्रयोग करें। नंगे फर्श पर बैठकर पाठ न करें।
समयब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से 1.5 घंटे पूर्व) या सूर्योदय का समय श्रेष्ठ है। संध्या काल में भी पाठ किया जा सकता है। ग्रहण काल में पाठ का फल 1000 गुना माना जाता है।
2.2 पूजा सामग्री

एक चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं। उस पर नवग्रह यंत्र या नवग्रहों का चित्र स्थापित करें। यदि चित्र उपलब्ध न हो, तो चावल (अक्षत) से 1 ढेरी बनाकर नवग्रहों का आवाहन किया जा सकता है। धूप, दीप, पुष्प, और जल का पात्र (कलश) पास रखें।

2.3 संकल्प विधि
  1. दाहिने हाथ में जल, अक्षत (चावल), और एक पुष्प लें।
  2. मन में अपना नाम, गोत्र, स्थान और पाठ का उद्देश्य (जैसे- "मैं अपने कुंडली के ग्रह दोष निवारण और पारिवारिक सुख-शांति हेतु नवग्रह चालीसा का पाठ कर रहा हूँ") बोलें।
  3. जल को भूमि पर छोड़ दें।
2.4 पाठ प्रक्रिया
  • गणेश और गुरु वंदना: सर्वप्रथम "श्री गणेशाय नमः" और अपने गुरु का ध्यान करें। चालीसा का प्रारंभिक दोहा (श्री गणपति गुरुपद कमल...) इसी उद्देश्य के लिए है।
  • मूल पाठ: अब चालीसा की 40 चौपाइयों का लयबद्ध पाठ करें। उच्चारण स्पष्ट और त्रुटिरहित होना चाहिए।
  • अंतिम दोहा और फलश्रुति: पाठ को अंतिम दोहे तक पूरा करें।
  • क्षमा प्रार्थना: अंत में देवता से त्रुटियों के लिए क्षमा मांगें- "आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥"
2.5 नैवेद्य (भोग) अर्पण

यद्यपि मानसिक भक्ति प्रधान है, तथापि ग्रहों की प्रकृति के अनुसार भोग लगाना लाभकारी होता है:

  • सूर्य: गुड़ या गेहूं की रोटी।
  • चन्द्र: दूध, खीर या बताशा।
  • मंगल: गुड़, मसूर की दाल या लाल मिठाई।
  • बुध: मूंग की दाल या हरे फल।
  • गुरु: बेसन के लड्डू या चने की दाल।
  • शुक्र: दही, सफेद मिठाई।
  • शनि/राहु/केतु: काले तिल, उड़द की दाल या सरसों का तेल।
2.6 अनुष्ठान के विशेष प्रकार
  • नित्य पाठ: प्रतिदिन एक बार पाठ करना सामान्य जीवन में सुरक्षा कवच का कार्य करता है।
  • चालीसा अनुष्ठान: किसी विशेष कष्ट के निवारण के लिए 40 दिनों तक प्रतिदिन 108 पाठ करने का विधान है। इसे 'महा-अनुष्ठान' कहते हैं।
  • लघु अनुष्ठान: लगातार 7, 11, या 21 दिनों तक प्रतिदिन 7 या 11 बार पाठ करना।

❓ इस विषय के 5 प्रश्न

पूजा विधि

नवग्रह शांति पूजा की विधि क्या है?

नवग्रह शांति: मण्डल स्थापना (9 ग्रह अपने अनाज-वस्त्र सहित) → पूजन-मंत्र → नवग्रह स्तोत्र → प्रत्येक ग्रह की विशेष समिधा से हवन → निर्धारित जप संख्या → ग्रहानुसार दान। ज्योतिषीय परामर्श और अनुभवी पुरोहित आवश्यक।

यंत्र

नवग्रह यंत्र स्थापित करने की विधि क्या है?

रविवार/गुरुवार, गंगाजल+पंचामृत शुद्धि, पूर्व/उत्तर। नवग्रह स्तोत्र + 9 बीज 108-108। हवन (9 सामग्री)। नित्य: स्तोत्र+दीपक। सर्वग्रह शांति। ज्योतिषी से सही यंत्र चयन।

देवता पूजा

नवग्रह देवताओं पूजा एक साथ कैसे

नौ सुपारी या यंत्र, प्रत्येक ग्रह रंग फूल, 9 बीज मंत्र 11/108 बार। नवग्रह स्तोत्र। सरलतम — महामृत्युंजय या गायत्री सभी ग्रह शांत करता। विशेष — पंडित से नवग्रह हवन।

ज्योतिष

नवग्रह शांति मंत्र का जप एक साथ कैसे करें?

सरलतम: नवग्रह स्तोत्र ('जपाकुसुमसंकाशं...') प्रतिदिन = 5 मिनट = 9 ग्रह शांत। क्रमिक: 9 ग्रह × 108 = 972 जप। एकत्र बीज मंत्र (सभी बीज एक में) 108 बार। शनिवार/रविवार। सूर्योदय।

ज्योतिष उपाय

नवग्रह यंत्र कैसे स्थापित करें?

शुक्ल पक्ष रविवार/नवरात्रि। पूर्व/ईशान दिशा, लाल कपड़ा, पंचामृत+गंगाजल शुद्धि, 'ब्रह्मा मुरारि त्रिपुरांतकारी...' 108 बार। प्रतिदिन धूप-दीप। 9 ग्रह एक साथ शांत। प्रामाणिक यंत्र+नित्य पूजा अनिवार्य।

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