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नवग्रह यंत्र कैसे स्थापित करें?

शुक्ल पक्ष रविवार/नवरात्रि। पूर्व/ईशान दिशा, लाल कपड़ा, पंचामृत+गंगाजल शुद्धि, 'ब्रह्मा मुरारि त्रिपुरांतकारी. . . ' 108 बार। प्रतिदिन धूप-दीप। 9 ग्रह एक साथ शांत।

संक्षिप्त उत्तर

शुक्ल पक्ष रविवार/नवरात्रि। पूर्व/ईशान दिशा, लाल कपड़ा, पंचामृत+गंगाजल शुद्धि, 'ब्रह्मा मुरारि त्रिपुरांतकारी...' 108 बार। प्रतिदिन धूप-दीप। 9 ग्रह एक साथ शांत। प्रामाणिक यंत्र+नित्य पूजा अनिवार्य।

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विस्तृत उत्तर

नवग्रह यंत्र = एक ही यंत्र में सभी 9 ग्रहों (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु) के यंत्र — ग्रह दोष निवारण का सबसे प्रभावी उपाय।

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### शुभ दिन:

  • ▸शुक्ल पक्ष का रविवार = सर्वोत्तम।
  • ▸नवरात्रि के दौरान = अत्यंत शुभ।
  • ▸अन्य शुभ: गुरुपुष्यामृत योग, अक्षय तृतीया।

### स्थापना विधि:

चरण 1 — तैयारी

  • ▸सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ▸घर का मंदिर अच्छे से साफ करें।

चरण 2 — चौकी तैयार

  • ▸एक चौकी को पूर्व या उत्तर या ईशान (उत्तर-पूर्व) दिशा में रखें।
  • ▸चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएँ।

चरण 3 — यंत्र शुद्धि

  • ▸नवग्रह यंत्र को एक पात्र में रखकर जल + पंचामृत + गाय का कच्चा दूध + गंगाजल से शुद्ध करें।
  • ▸स्वच्छ कपड़े से पोंछकर सुखा लें।

चरण 4 — स्थापना

  • ▸शुद्ध यंत्र को चौकी पर स्थापित करें।
  • ▸धूप-दीप जलाएँ, पुष्प-अक्षत अर्पित करें।

चरण 5 — मंत्र जप

  • ▸नवग्रह सामूहिक मंत्र:

*'ब्रह्मा मुरारि त्रिपुरांतकारी भानुः शशि भूमिसुतो बुधश्च।*

*गुरुश्च शुक्रः शनि राहु केतवः सर्वे ग्रहा शांतिकरा भवन्तु॥'*

  • ▸इस मंत्र का 108 बार जप करें।
  • ▸इसके अतिरिक्त प्रत्येक ग्रह का बीज मंत्र 11-11 बार भी जप सकते हैं।

चरण 6 — नित्य पूजा

  • ▸स्थापना के बाद प्रतिदिन धूप-दीप जलाकर यंत्र की पूजा करें।
  • ▸सप्ताह में कम से कम रविवार को विशेष पूजा अवश्य करें।

### कहाँ स्थापित करें:

  • ▸पूजा घर (सर्वोत्तम), दुकान/ऑफिस (व्यापार लाभ), कार्यालय (करियर उन्नति)।

### लाभ:

  • ▸सभी 9 ग्रहों का शुभ प्रभाव बढ़ता है।
  • ▸कुंडली के ग्रह दोष शांत होते हैं।
  • ▸शारीरिक, मानसिक और आर्थिक समस्याओं से मुक्ति।
  • ▸घर/कार्यस्थल में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

### ⚠️ महत्वपूर्ण सावधानियाँ:

  • ▸यंत्र में कोई कमी/दोष नहीं होना चाहिए — प्रामाणिक स्रोत से खरीदें।
  • ▸विद्वान पंडित/ज्योतिषी से करवाना सर्वोत्तम — विशेषतः पहली बार।
  • ▸यंत्र स्थापना के बाद नियमित पूजा अनिवार्य — बिना पूजा = निष्क्रिय।
  • ▸यंत्र को अपवित्र/गंदे स्थान पर कभी न रखें।
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