विस्तृत उत्तर
नवग्रह यंत्र = एक ही यंत्र में सभी 9 ग्रहों (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु) के यंत्र — ग्रह दोष निवारण का सबसे प्रभावी उपाय।
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### शुभ दिन:
- ▸शुक्ल पक्ष का रविवार = सर्वोत्तम।
- ▸नवरात्रि के दौरान = अत्यंत शुभ।
- ▸अन्य शुभ: गुरुपुष्यामृत योग, अक्षय तृतीया।
### स्थापना विधि:
चरण 1 — तैयारी
- ▸सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- ▸घर का मंदिर अच्छे से साफ करें।
चरण 2 — चौकी तैयार
- ▸एक चौकी को पूर्व या उत्तर या ईशान (उत्तर-पूर्व) दिशा में रखें।
- ▸चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएँ।
चरण 3 — यंत्र शुद्धि
- ▸नवग्रह यंत्र को एक पात्र में रखकर जल + पंचामृत + गाय का कच्चा दूध + गंगाजल से शुद्ध करें।
- ▸स्वच्छ कपड़े से पोंछकर सुखा लें।
चरण 4 — स्थापना
- ▸शुद्ध यंत्र को चौकी पर स्थापित करें।
- ▸धूप-दीप जलाएँ, पुष्प-अक्षत अर्पित करें।
चरण 5 — मंत्र जप
- ▸नवग्रह सामूहिक मंत्र:
*'ब्रह्मा मुरारि त्रिपुरांतकारी भानुः शशि भूमिसुतो बुधश्च।*
*गुरुश्च शुक्रः शनि राहु केतवः सर्वे ग्रहा शांतिकरा भवन्तु॥'*
- ▸इस मंत्र का 108 बार जप करें।
- ▸इसके अतिरिक्त प्रत्येक ग्रह का बीज मंत्र 11-11 बार भी जप सकते हैं।
चरण 6 — नित्य पूजा
- ▸स्थापना के बाद प्रतिदिन धूप-दीप जलाकर यंत्र की पूजा करें।
- ▸सप्ताह में कम से कम रविवार को विशेष पूजा अवश्य करें।
### कहाँ स्थापित करें:
- ▸पूजा घर (सर्वोत्तम), दुकान/ऑफिस (व्यापार लाभ), कार्यालय (करियर उन्नति)।
### लाभ:
- ▸सभी 9 ग्रहों का शुभ प्रभाव बढ़ता है।
- ▸कुंडली के ग्रह दोष शांत होते हैं।
- ▸शारीरिक, मानसिक और आर्थिक समस्याओं से मुक्ति।
- ▸घर/कार्यस्थल में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
### ⚠️ महत्वपूर्ण सावधानियाँ:
- ▸यंत्र में कोई कमी/दोष नहीं होना चाहिए — प्रामाणिक स्रोत से खरीदें।
- ▸विद्वान पंडित/ज्योतिषी से करवाना सर्वोत्तम — विशेषतः पहली बार।
- ▸यंत्र स्थापना के बाद नियमित पूजा अनिवार्य — बिना पूजा = निष्क्रिय।
- ▸यंत्र को अपवित्र/गंदे स्थान पर कभी न रखें।





