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स्थापना — प्रश्नोत्तरी

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 19 प्रश्न

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लक्ष्मी पूजा

लक्ष्मी पूजा में श्रीयंत्र की स्थापना कैसे करें?

दीपावली/शुक्रवार। ईशान कोण, ताम्र/रजत/भोजपत्र। पंचामृत शुद्धि → श्री सूक्त + 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं' 108। लाल कपड़ा, कमल, कुमकुम। प्रतिदिन दीपक + जप। धन समृद्धि, ऋण मुक्ति।

श्रीयंत्रस्थापनालक्ष्मी
तंत्र शास्त्र

तंत्र में अग्नि स्थापना कैसे करें?

कुंड (चतुष्कोण) → शुभ समिधा (आम/पीपल/बिल्व) → अग्नि प्रज्वलन (काष्ठ/दीपक) → 'ॐ अग्नये नमः' → घी+समिधा+मंत्र = प्रथम आहुति। ऋग्वेद: 'अग्नि=देवताओं का मुख।' विद्वान से सीखें।

अग्निस्थापनाहवन
शिव पूजा विधि

शिवलिंग की प्राण प्रतिष्ठा कैसे होती है, विधि सहित?

नर्मदेश्वर/स्वयंभू = प्राण प्रतिष्ठा अनावश्यक। मनुष्य निर्मित = अनिवार्य। विधि: शुभ मुहूर्त → भूमि शुद्धि → गणेश-नवग्रह पूजन → कलश स्थापना → वैदिक मंत्रों से प्राण आवाहन → षोडशोपचार पूजन → हवन → पूर्णाहुति। योग्य पुरोहित से ही कराएं। घर के लिए नर्मदेश्वर सर्वोत्तम विकल्प।

प्राण प्रतिष्ठाशिवलिंगस्थापना
शिव साधना

शिव यंत्र स्थापित करने की विधि क्या है?

सोमवार/शिवरात्रि। गंगाजल शुद्धि → 108 मंत्र जप → लाल/सफेद वस्त्र पर स्थापन → चंदन-अक्षत-फूल → दीपक-आरती। उत्तर/पूर्व दिशा। प्रतिदिन जल छिड़कें + दीपक + जप। खंडित हो तो विसर्जन।

शिव यंत्रस्थापनाविधि
तंत्र शास्त्र

यंत्र की प्राण प्रतिष्ठा कैसे की जाती है?

प्राण प्रतिष्ठा = यंत्र में देवता प्राण स्थापना। विधि: शुभ मुहूर्त → गंगाजल/पंचामृत शुद्धि → षोडशोपचार → प्राण प्रतिष्ठा मंत्र → देवता मंत्र 108 → हवन → आरती। विद्वान पंडित/गुरु से। प्रतिदिन पूजा अनिवार्य।

प्राण प्रतिष्ठायंत्रस्थापना
लक्ष्मी पूजा

लक्ष्मी जी की मूर्ति घर में किस दिशा में रखनी चाहिए?

पूर्व/उत्तर मुख। ईशान कोण सर्वोत्तम। गणेश बाईं, लक्ष्मी दाहिनी। विष्णु साथ। शौचालय दीवार से दूर। ऊंचे स्थान। दीपावली: मुख द्वार की ओर।

मूर्तिदिशावास्तु
हवन/यज्ञ

हवन में अग्नि स्थापना कैसे करें?

उपले+घी → परतें (वायु हो) → दीपक से प्रज्वलित → पंखा। 'ॐ भूर्भुवः स्वः'। अमर उजाला: 'निरंतर प्रज्वलित, धुआं नहीं। केरोसीन/स्प्रिट=कभी नहीं!' गायत्री मंत्र।

अग्निस्थापनाकैसे
गणेश पूजा

गणेश यंत्र स्थापित करने की विधि और लाभ क्या हैं?

शुभ मुहूर्त: बुधवार/चतुर्थी। शुद्धि: गंगाजल+पंचामृत। पूर्व/उत्तर दिशा, लाल कपड़े पर। सिंदूर तिलक, दूर्वा, 108 जप। लाभ: विघ्न नाश, व्यापार उन्नति, ऋण मुक्ति, बुद्धि, वास्तु शांति। प्रतिदिन पूजा अनिवार्य।

गणेश यंत्रस्थापनाविघ्न नाश
पूजा विधि

पूजा घर में स्फटिक श्री यंत्र कैसे स्थापित करें

स्फटिक श्री यंत्र शुभ मुहूर्त (दीपावली/नवरात्रि/शुक्रवार) पर स्थापित करें। गंगाजल-पंचामृत से स्नान → ईशान कोण में लाल/पीले कपड़े पर स्थापना → श्री सूक्त पाठ → 'ॐ श्रीं नमः' 108 बार जप। नित्य दीपक-धूप अनिवार्य। प्राण प्रतिष्ठा गुरु/पंडित से कराएं।

स्फटिकश्री यंत्रस्थापना
संस्कार विधि

वास्तु पूजा में नवग्रह स्थापना कैसे करें?

नवग्रह स्थापना: यंत्र/मण्डल (केन्द्र=सूर्य, चारों दिशा+कोण) → प्रत्येक ग्रह पर सम्बंधित पुष्प-मंत्र → हवन (108×9 आहुति, सम्बंधित समिधा) → नवग्रह स्तोत्र। उद्देश्य: वास्तु+ग्रह दोष शांति।

वास्तु पूजानवग्रहस्थापना
गणेश उपासना

गणेश विसर्जन के बाद मूर्ति घर में रख सकते हैं या नहीं

गणेश मूर्ति: मिट्टी/POP = अस्थायी, विसर्जन अनिवार्य (आवाहन हुई हो)। धातु/पत्थर = स्थायी, घर में रखें, नित्य पूजा। विसर्जित मूर्ति वापस न रखें। इको-फ्रेंडली: शुद्ध मिट्टी, बाल्टी विसर्जन → मिट्टी बगीचे में। पीढ़ियों की धातु मूर्ति = पूर्णतः शुभ।

गणेशविसर्जनमूर्ति
पूजा रहस्य

पूजा में कलश क्यों रखा जाता है?

कलश क्यों: समुद्र मंथन के अमृत पात्र का प्रतीक। कलश मंत्र: मुख में विष्णु, गले में रुद्र, मूल में ब्रह्मा। पंचतत्व का प्रतीक। नवरात्रि में देवी का अस्थायी निवास। अथर्व वेद: कलश पूर्णता और समृद्धि का प्रतीक।

कलशघटस्थापना
पूजा नियम

शिवलिंग घर में रखना शुभ है या नहीं?

घर में शिवलिंग रखना शुभ है — शिव पुराण में इसकी अनुमति है। नियम: अंगूठे से बड़ा न हो, एक ही लिंग, ईशान कोण में, नित्य पूजा अनिवार्य। नर्मदेश्वर या स्फटिक शिवलिंग सर्वोत्तम। नित्य पूजा न कर सकें तो पार्थिव (मिट्टी का) लिंग बनाकर पूजें और विसर्जित करें।

घर शिवलिंगस्थापनानियम
यंत्र

महामृत्युंजय यंत्र स्थापित करने की विधि क्या है?

सोमवार/शिवरात्रि/श्रावण। गंगाजल+पंचामृत शुद्धि। पूर्व/उत्तर दिशा। बिल्वपत्र, दूध। प्राण प्रतिष्ठा + महामृत्युंजय 108। नित्य जलाभिषेक+11/21 जप। लाभ: मृत्यु भय, रोग, ग्रह शांति, दीर्घायु।

महामृत्युंजययंत्रस्थापना
दुर्गा साधना

दुर्गा यंत्र स्थापना की विधि और लाभ क्या हैं?

नवरात्रि/अष्टमी स्थापन। गंगाजल शुद्धि → 108 जप अभिमंत्रण → लाल कपड़ा पूर्व दिशा → लाल पुष्प+सिंदूर → दीपक। लाभ: शत्रु नाश, गृह शांति, वास्तु, कानूनी विजय।

दुर्गा यंत्रस्थापनाविधि
श्री विद्या

श्री यंत्र को घर में कहाँ और कैसे स्थापित करें?

ईशान कोण (उत्तर-पूर्व), ऊंचे स्थान। ताम्रपत्र/रजत/स्फटिक। दीपावली/शुक्रवार। पंचामृत शुद्धि + श्री सूक्त + 108 जप। प्रतिदिन दीपक + 'ॐ श्रीं नमः' 11 बार। शयनकक्ष/शौचालय से दूर।

श्री यंत्रघरस्थापना
यंत्र

नवग्रह यंत्र स्थापित करने की विधि क्या है?

रविवार/गुरुवार, गंगाजल+पंचामृत शुद्धि, पूर्व/उत्तर। नवग्रह स्तोत्र + 9 बीज 108-108। हवन (9 सामग्री)। नित्य: स्तोत्र+दीपक। सर्वग्रह शांति। ज्योतिषी से सही यंत्र चयन।

नवग्रहयंत्रस्थापना
गणेश पूजा

गणेश चतुर्थी पर गणपति स्थापना की विधि क्या है?

मिट्टी मूर्ति, लाल कपड़ा/चौकी। प्राण प्रतिष्ठा: 'ॐ गं गणपतये नमः'। षोडशोपचार। मोदक+21 दूर्वा+लाल फूल। अथर्वशीर्ष पाठ। विसर्जन: 1.5-10 दिन। चंद्र दर्शन वर्जित।

गणेश चतुर्थीस्थापनाविधि
मंदिर वास्तु

मंदिर में नवग्रह की प्रतिमाएं किस क्रम में स्थापित होनी चाहिए?

सूर्य = केंद्र। 8 ग्रह = 8 दिशा। 'मुख दूसरे ओर नहीं' (Wikipedia)। चंद्र=NE, मंगल=S, बुध=N, बृहस्पति=NE, शुक्र=E, शनि=W, राहु=SW, केतु=NW। ईशान में स्थापित।

नवग्रहक्रमस्थापना

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

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