विस्तृत उत्तर
घर में शिवलिंग रखने के नियम शिव पुराण की विद्येश्वर संहिता और धर्म सिंधु में वर्णित हैं:
शिव पुराण का स्पष्ट मत
शिव पुराण में घर में शिवलिंग की पूजा की अनुमति है और इसे शुभ बताया गया है। भगवान शिव की कृपा के लिए घर में लिंग की स्थापना और नित्य पूजा का विधान है।
घर में शिवलिंग रखने के नियम
- 1आकार:
धर्म सिंधु के अनुसार घर में रखे शिवलिंग का आकार अंगूठे से बड़ा नहीं होना चाहिए। बड़े शिवलिंग मंदिर के लिए हैं। छोटा, सुंदर पाषाण (पत्थर) का लिंग उचित है।
- 1एक ही शिवलिंग:
घर में एक से अधिक शिवलिंग न रखें।
- 1स्थान:
ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में — वास्तु शास्त्र के अनुसार यह शिव की दिशा है।
- 1नित्य पूजा:
शिवलिंग स्थापित करने के बाद नित्य पूजा करनी चाहिए। यदि नित्य पूजा न हो सके तो शिवलिंग स्थापना उचित नहीं।
- 1पार्थिव लिंग:
मिट्टी का पार्थिव लिंग बनाकर पूजा करना और विसर्जित करना भी शास्त्रसम्मत है — रोज नया पार्थिव लिंग बनाएं और विसर्जित करें।
लोक मान्यता और शास्त्र
कुछ परंपराओं में 'घर में शिवलिंग नहीं रखना चाहिए' की बात कही जाती है — किंतु यह शास्त्रसम्मत नहीं है। यह भय मुख्यतः 'नित्य पूजा न हो पाने' की चिंता से उपजी है। यदि नियमित पूजा हो तो शिवलिंग घर में रखना पूर्णतः शुभ है।
सर्वोत्तम शिवलिंग
- ▸नर्मदेश्वर (नर्मदा नदी का पत्थर) — सर्वोत्तम
- ▸स्फटिक शिवलिंग — अत्यंत शुभ
- ▸पाषाण (पत्थर) — स्वीकार्य
- ▸पारद (पारे का) शिवलिंग — उच्च साधकों के लिए




