विस्तृत उत्तर
पूजा में दीपक न बुझाने का नियम धर्म सिंधु और स्कंद पुराण में वर्णित है:
1देवता की उपस्थिति
स्कंद पुराण: 'जहाँ दीपक जलता है, वहाँ देवता विराजते हैं।' दीपक बुझाना = देवता को विदा करना।
2अशुभ संकेत
पूजा के बीच दीपक बुझाना अपशकुन माना जाता है। हवा के झोंके से नहीं — जानबूझकर बुझाना विशेष रूप से वर्जित।
3पूजा की पूर्णता
जब तक पूजा पूर्ण न हो, दीपक जलते रहना चाहिए। पूजा समाप्त होने पर ही दीपक बुझाएं।
4मंगल
दीपक जलना = मंगल। बुझाना = मंगल का अंत।
यदि दीपक बुझ जाए
धर्म सिंधु — घबराएं नहीं, पुनः जलाएं। 'ॐ नमः शिवाय' या इष्ट मंत्र 11 बार जपें।
पूजा के बाद
पूजा पूर्ण होने पर दीपक को फूँककर नहीं — हाथ से हवा देकर या दीपक ढककर बुझाएं। फूँककर बुझाना अपमानजनक माना जाता है।





