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पूजा नियम📜 धर्म सिंधु, आगम शास्त्र — दीप नियम, स्कंद पुराण1 मिनट पठन

पूजा के दौरान दीपक क्यों नहीं बुझाना चाहिए?

संक्षिप्त उत्तर

दीपक न बुझाएं क्यों: दीपक में देवता की उपस्थिति (स्कंद पुराण)। बुझाना = मंगल का अंत। पूजा पूर्ण होने पर हाथ से हवा देकर या ढककर बुझाएं — फूँककर नहीं। यदि बुझ जाए: दोबारा जलाएं, इष्ट मंत्र 11 बार जपें।

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विस्तृत उत्तर

पूजा में दीपक न बुझाने का नियम धर्म सिंधु और स्कंद पुराण में वर्णित है:

1देवता की उपस्थिति

स्कंद पुराण: 'जहाँ दीपक जलता है, वहाँ देवता विराजते हैं।' दीपक बुझाना = देवता को विदा करना।

2अशुभ संकेत

पूजा के बीच दीपक बुझाना अपशकुन माना जाता है। हवा के झोंके से नहीं — जानबूझकर बुझाना विशेष रूप से वर्जित।

3पूजा की पूर्णता

जब तक पूजा पूर्ण न हो, दीपक जलते रहना चाहिए। पूजा समाप्त होने पर ही दीपक बुझाएं।

4मंगल

दीपक जलना = मंगल। बुझाना = मंगल का अंत।

यदि दीपक बुझ जाए

धर्म सिंधु — घबराएं नहीं, पुनः जलाएं। 'ॐ नमः शिवाय' या इष्ट मंत्र 11 बार जपें।

पूजा के बाद

पूजा पूर्ण होने पर दीपक को फूँककर नहीं — हाथ से हवा देकर या दीपक ढककर बुझाएं। फूँककर बुझाना अपमानजनक माना जाता है।

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शास्त्रीय स्रोत
धर्म सिंधु, आगम शास्त्र — दीप नियम, स्कंद पुराण
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