विस्तृत उत्तर
हाथ धोने का महत्व मनुस्मृति और धर्म सिंधु में वर्णित है:
1बाह्य शुद्धि
देव पूजा में हाथ की शुद्धता अनिवार्य। मनुस्मृति: 'शुचिर्भूत्वा पूजयेद् देवम्' — शुद्ध होकर देव की पूजा करें।
2प्रत्येक क्रिया से पहले
- ▸शौच के बाद हाथ धोना
- ▸भोजन के बाद हाथ धोकर पूजा
- ▸किसी अशुद्ध वस्तु को छूने के बाद
3आचमन
हाथ धोने के बाद आचमन (जल पीना) — यह आंतरिक और बाह्य दोनों शुद्धि।
4वैज्ञानिक
हाथों पर लाखों बैक्टीरिया — धोने से नष्ट। पूजा में स्वच्छ हाथ = स्वच्छ सामग्री।
5देव का सम्मान
देवता को अर्पित वस्तु शुद्ध हाथों से — यह देव का सम्मान है।
न्यूनतम
यदि पूर्ण स्नान संभव न हो — हाथ-पाँव धोकर और आचमन करके पूजा पर्याप्त।




