विस्तृत उत्तर
गणेश विसर्जन और मूर्ति रखने के बारे में स्पष्ट नियम हैं।
विसर्जन अनिवार्य (प्राण-प्रतिष्ठित मूर्ति)
गणेश चतुर्थी पर जिस मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा (आवाहन) की गई है, उसका विसर्जन अनिवार्य — 1.5, 3, 5, 7, 10, या 11 दिन बाद (अनन्त चतुर्दशी तक)। मिट्टी/POP की मूर्ति जल में विसर्जित करें।
स्थायी मूर्ति (घर में रख सकते हैं)
- ▸पंचधातु, संगमरमर, पत्थर, या अष्टधातु की मूर्ति = स्थायी स्थापना = विसर्जन नहीं।
- ▸ये मूर्तियाँ पूजा घर में सदैव रहती हैं — नित्य पूजा करें।
नियम
- 1मिट्टी/POP = अस्थायी — आवाहन + विसर्जन अनिवार्य।
- 2धातु/पत्थर = स्थायी — घर में रखें, नित्य पूजा।
- 3विसर्जन के बाद वही मिट्टी की मूर्ति घर में न रखें — शास्त्रीय नियम।
- 4यदि जल प्रदूषण की चिन्ता हो, तो घर में बाल्टी/टब में विसर्जन कर मिट्टी बगीचे/पौधे में डालें।
इको-फ्रेंडली विकल्प
शुद्ध मिट्टी (शड्डू) की मूर्ति — जल में आसानी से घुलती है, प्रदूषण नहीं। POP से बचें।
ध्यान दें: कुछ परिवारों में पीढ़ियों से एक ही मूर्ति (धातु) की पूजा होती है — यह पूर्णतः शुभ और मान्य है।





