विस्तृत उत्तर
गणेश जी की मूर्ति की दिशा और सूँड (शुण्ड) का विशेष महत्व है।
मुख की दिशा
- ▸पूजा घर में मूर्ति का मुख पश्चिम या पूर्व दिशा में हो — भक्त पूर्व/पश्चिम मुख बैठकर पूजा करे।
- ▸प्रवेश द्वार पर लगाएँ तो मुख द्वार की ओर (बाहर से आने वाले की ओर) = विघ्न बाहर रोकना।
सूँड की दिशा (अत्यन्त महत्वपूर्ण)
1बायीं सूँड (वाममुखी) — सर्वोत्तम (घर हेतु)
सूँड बायीं ओर मुड़ी = सौम्य, शान्त, गृहस्थ के लिए शुभ। सुख-समृद्धि, शान्ति। पूजा सरल — विशेष नियमों की आवश्यकता कम।
2दायीं सूँड (दक्षिणमुखी/सिद्धिविनायक)
सूँड दायीं ओर = सिद्धिविनायक, शक्तिशाली किन्तु कठोर नियमों वाला। पूजा में विशेष सावधानी — नियम टूटने पर अशुभ। सामान्य भक्तों हेतु अनुशंसित नहीं (कुछ परम्पराओं में)।
3सीधी सूँड
सूँड सीधी नीचे = सुषुम्ना नाड़ी, कुण्डलिनी जागरण। योगी/साधकों हेतु।
स्थान
- ▸ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) = पूजा घर हेतु सर्वोत्तम।
- ▸प्रवेश द्वार के ऊपर = बाधा निवारण।
सरल नियम: घर में बायीं सूँड वाले गणेश रखें = सर्वश्रेष्ठ, सर्वसुलभ, कम नियम।





