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दिशा प्रश्नोत्तरी — 61 प्रश्न

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित दिशा विषय के प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 61 प्रश्न

वास्तु शास्त्र

वास्तु में नीले रंग का प्रयोग कब करें

पश्चिम दिशा के कमरे, बाथरूम, स्टडी रूम और बेडरूम में हल्का नीला रंग शुभ है। रसोई में नीला न करें। शांति, एकाग्रता और मानसिक सुकून के लिए उपयुक्त।

वास्तुनीला रंगदिशा
वास्तु शास्त्र

वास्तु में दर्पण लगाने के नियम कौन से हैं

दर्पण उत्तर या पूर्व दिशा की दीवार पर लगाएँ। दक्षिण और पश्चिम में न लगाएँ। बेडरूम में बिस्तर के सामने न हो। आयताकार/चौकोर आकार शुभ, टूटा दर्पण तुरंत बदलें।

वास्तुदर्पणआईना
मंत्र विधि

मंत्र जप में दिशा और आसन का चयन कैसे करें?

दिशा: पूर्व=सामान्य, उत्तर=ज्ञान/मोक्ष, दक्षिण=पितृ। आसन: कुश=सर्वोत्तम (गीता 6.11), ऊनी कंबल, रेशम। खुली भूमि=वर्जित (ब्रह्माण्ड पुराण)। रंग: पीला=ज्ञान, लाल=शक्ति, काला=तांत्रिक, श्वेत=शांति।

दिशाआसनचयन
लक्ष्मी पूजा

लक्ष्मी जी की मूर्ति घर में किस दिशा में रखनी चाहिए?

पूर्व/उत्तर मुख। ईशान कोण सर्वोत्तम। गणेश बाईं, लक्ष्मी दाहिनी। विष्णु साथ। शौचालय दीवार से दूर। ऊंचे स्थान। दीपावली: मुख द्वार की ओर।

मूर्तिदिशावास्तु
मंत्र जप नियम

मंत्र जप करते समय किस दिशा में मुख करके बैठना चाहिए?

पूर्व = सर्वसाधारण (सूर्योदय/ऊर्जा)। उत्तर = शिव/ज्ञान/धन (कैलाश)। दक्षिण = वर्जित (यम)। शिव=उत्तर, देवी=पूर्व, विष्णु=पूर्व, सूर्य=पूर्व।

दिशामुखजप
वास्तु शास्त्र

वास्तु के अनुसार किस दिशा में बैठकर पढ़ाई करें बच्चे

पूर्व या उत्तर-पूर्व (ईशान) दिशा की ओर मुँह करके पढ़ाई करें। स्टडी रूम उत्तर, पूर्व या ईशान कोण में हो। दक्षिण दिशा की ओर मुँह करके पढ़ाई न करें।

वास्तुपढ़ाईस्टडी रूम
हवन/यज्ञ

हवन कुंड का आकार और दिशा क्या होनी चाहिए?

वर्गाकार (सामान्य), त्रिकोण (शक्ति), वृत्त (शांति)। घर=1×1 फीट। गहराई=चौड़ाई/3। पूर्व मुख (यजमान=पश्चिम)। तांबा=सर्वोत्तम। वेदी=चारों ओर।

हवन कुंडआकारदिशा
धर्म ज्ञान

चार मठ कहाँ हैं और किसने स्थापित किए?

शंकराचार्य(8वीं सदी): पूर्व=गोवर्धन(पुरी/ऋग्वेद), दक्षिण=शृंगेरी(कर्नाटक/यजुर्वेद), पश्चिम=द्वारका(गुजरात/सामवेद), उत्तर=ज्योतिर्मठ(बदरीनाथ/अथर्ववेद)। 4 महावाक्य। वैदिक धर्म पुनर्स्थापना।

चार मठशंकराचार्यदिशा
श्रीमद्भागवत

भागवत कथा में श्रोता किस दिशा में बैठें?

श्रोता वक्ता की दिशा के अनुसार पूर्वमुख या उत्तरमुख बैठें; एक मत से वक्ता और श्रोता दोनों पूर्वमुख भी बैठ सकते हैं।

श्रोतादिशाभागवत कथा
लोक

विष्णु की श्वास से दिशा कैसे बनी?

श्वास से देश-काल और दिशाएँ बनीं।

विष्णु श्वासदिशासृष्टि
लोक

अष्टमी श्राद्ध में देव तर्पण कैसे अलग है?

देव तर्पण पूर्वमुख, पितृ तर्पण दक्षिणमुख।

देव तर्पणपितृ तर्पणदिशा
मरणोपरांत आत्मा यात्रा

शवदाह के समय शव का सिर किस दिशा में रखना चाहिए?

शवदाह के समय शव का सिर उत्तर दिशा की ओर रखना चाहिए।

शवदाहदिशाउत्तर दिशा
पाठ विधि और नियम

चन्द्रशेखराष्टकम् पाठ के लिए कौन सी दिशा में बैठना चाहिए?

सामान्य: प्रातःकाल पूर्व, सायंकाल पश्चिम दिशा। चन्द्रदोष निवारण के लिए उत्तर या उत्तर-पश्चिम (वायव्य) दिशा में बैठकर पाठ करना विशेष लाभकारी है।

दिशापूर्व दिशापश्चिम दिशा
मंत्र जप विधि और नियम

नाग मंत्र जप के लिए कौन सी दिशा में बैठना चाहिए?

नाग मंत्र जप के लिए पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए।

दिशापूर्व उत्तरजप विधि
स्तोत्र पाठ विधि और नियम

अर्धनारीश्वर स्तोत्र पाठ के लिए किस दिशा में बैठना चाहिए?

अर्धनारीश्वर स्तोत्र पाठ के लिए पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके शुद्ध, शांत कमरे में आसन पर बैठना चाहिए।

दिशापूर्व उत्तरआसन
दक्षिणामूर्ति साधना

साधना की दिशा और समय क्या है?

साधना के लिए दक्षिण दिशा और ब्रह्ममुहूर्त का समय सबसे उत्तम माना गया है।

दिशासमयब्रह्ममुहूर्त
शिव शाबर मंत्र

शाबर साधना के लिए आसन और जप के क्या निर्देश हैं?

लाल ऊनी आसन, रुद्राक्ष माला और रोजाना 501 या 1100 बार मंत्र का जप करना आवश्यक है।

आसनजप नियमरुद्राक्ष माला
भूतनाथ मंत्र साधना

भूतनाथ साधना के लिए सही दिशा कौन सी है?

साधना के लिए उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठना सबसे उत्तम माना गया है।

दिशासाधनानियम
श्री रुद्र-कवच-संहिता

कवच पाठ के लिए सबसे उत्तम दिशा कौन सी है?

कवच का पाठ करने के लिए पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना सबसे अच्छा है।

दिशाजप नियमसाधना
पाशुपत अस्त्र साधना

जप के समय किस दिशा में मुख रखना चाहिए?

दिन में पूर्व या उत्तर, और रात्रि में केवल उत्तर दिशा की ओर मुख करना चाहिए।

दिशाजपनियम
दैनिक आचार

भोजन करते समय किस दिशा में मुख करके बैठें

पूर्व (सर्वोत्तम — पाचन) या उत्तर (समृद्धि)। दक्षिण वर्जित। बैठकर खाएं। भोग अवश्य लगाएं। विस्तार: प्रश्न 143।

भोजनदिशावास्तु
वास्तु शास्त्र

वास्तु के अनुसार घर में कौन सी दिशा में खाना खाएं

भोजन करते समय मुख पूर्व (सर्वोत्तम — पाचन) या उत्तर (समृद्धि) की ओर हो। भोजन कक्ष पश्चिम या रसोई के पास शुभ। बैठकर, शांत वातावरण में, भगवान को भोग लगाकर भोजन करें।

भोजनदिशाभोजन कक्ष
वास्तु शास्त्र

वास्तु शास्त्र के अनुसार पानी की टंकी कहाँ होनी चाहिए

ऊपरी टंकी नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम) में और भूमिगत टंकी ईशान (उत्तर-पूर्व) में रखें। ईशान में ऊपरी टंकी और नैऋत्य में भूमिगत टंकी गंभीर दोष है। यह जल तत्व और भूमि ढलान के सिद्धांत पर आधारित है।

पानी की टंकीजलवास्तु
वास्तु शास्त्र

वास्तु शास्त्र के अनुसार सीढ़ी किस दिशा में होनी चाहिए

सीढ़ी नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम), दक्षिण या पश्चिम में हो। ईशान कोण में सीढ़ी सबसे बड़ा दोष। घुमाव clockwise, सीढ़ियां विषम संख्या में। सीढ़ी के नीचे पूजा स्थल या शयनकक्ष न बनाएं।

सीढ़ीदिशावास्तु

विषय-वार प्रश्नोत्तर

🙏पूजा विधि📿मंत्र जाप विधि🔱शिव पूजा🔮तंत्र साधना🏠वास्तु शास्त्र💭सपनों का मतलब🪐ज्योतिष उपाय🙏व्रत उपवास🔥देवी पूजा🧘ध्यान साधना🛕तीर्थ यात्रा🔥हवन यज्ञ📜स्तोत्र पाठ🐘गणेश पूजा🙏विष्णु भक्ति📖सनातन दर्शन🕯️श्राद्ध पितृ कर्म🎗️संस्कार विधि❤️भक्ति साधनाधार्मिक उपाय

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।