विस्तृत उत्तर
दिशा
- ▸पूर्व: सर्वसामान्य, सर्वमान्य — सूर्योदय दिशा = ज्ञान, प्रकाश। अधिकांश जप।
- ▸उत्तर: ज्ञान और मोक्ष हेतु — उत्तर = कुबेर (धन) + ध्रुव (स्थिरता)।
- ▸दक्षिण: पितृ कर्म, तर्पण, श्राद्ध। कुछ तांत्रिक साधना।
- ▸पश्चिम: कुछ विशेष ग्रह मंत्र (शनि)।
आसन (गीता 6.11)
चैलाजिनकुशोत्तरम्' — कुश (सर्वोत्तम), मृगचर्म, वस्त्र।
- ▸कुश आसन: सर्वश्रेष्ठ — ऊर्जा संरक्षण, पाप शमन।
- ▸ऊनी कंबल: सर्वसुलभ विकल्प।
- ▸रेशमी वस्त्र: शुभ।
- ▸लकड़ी की चौकी: मान्य।
खुली भूमि = वर्जित: ब्रह्माण्ड पुराण — 'भूमि पर बैठकर जप = दरिद्रता।'
आसन रंग (उद्देश्य अनुसार)
- ▸पीला: ज्ञान, विद्या, शांति।
- ▸लाल: शक्ति, दुर्गा/काली/हनुमान।
- ▸काला: भैरव, तांत्रिक।
- ▸श्वेत: सरस्वती, शांति।





