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मंत्र विधि📜 मंत्र शास्त्र, वास्तु शास्त्र, योग शास्त्र, गीता (6.11)1 मिनट पठन

मंत्र जप में दिशा और आसन का चयन कैसे करें?

संक्षिप्त उत्तर

दिशा: पूर्व=सामान्य, उत्तर=ज्ञान/मोक्ष, दक्षिण=पितृ। आसन: कुश=सर्वोत्तम (गीता 6.11), ऊनी कंबल, रेशम। खुली भूमि=वर्जित (ब्रह्माण्ड पुराण)। रंग: पीला=ज्ञान, लाल=शक्ति, काला=तांत्रिक, श्वेत=शांति।

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विस्तृत उत्तर

दिशा

  • पूर्व: सर्वसामान्य, सर्वमान्य — सूर्योदय दिशा = ज्ञान, प्रकाश। अधिकांश जप।
  • उत्तर: ज्ञान और मोक्ष हेतु — उत्तर = कुबेर (धन) + ध्रुव (स्थिरता)।
  • दक्षिण: पितृ कर्म, तर्पण, श्राद्ध। कुछ तांत्रिक साधना।
  • पश्चिम: कुछ विशेष ग्रह मंत्र (शनि)।

आसन (गीता 6.11)

चैलाजिनकुशोत्तरम्' — कुश (सर्वोत्तम), मृगचर्म, वस्त्र।
  • कुश आसन: सर्वश्रेष्ठ — ऊर्जा संरक्षण, पाप शमन।
  • ऊनी कंबल: सर्वसुलभ विकल्प।
  • रेशमी वस्त्र: शुभ।
  • लकड़ी की चौकी: मान्य।

खुली भूमि = वर्जित: ब्रह्माण्ड पुराण — 'भूमि पर बैठकर जप = दरिद्रता।'

आसन रंग (उद्देश्य अनुसार)

  • पीला: ज्ञान, विद्या, शांति।
  • लाल: शक्ति, दुर्गा/काली/हनुमान।
  • काला: भैरव, तांत्रिक।
  • श्वेत: सरस्वती, शांति।
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शास्त्रीय स्रोत
मंत्र शास्त्र, वास्तु शास्त्र, योग शास्त्र, गीता (6.11)
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